जन्माष्टमी व्रत रखने में असमर्थ हैं तो इन उपायों को अपनाकर ऐसे कमाएं बराबर का पुण्य
Janmashtami Upay:कई बार भक्त स्वास्थ्य या निजी कारणों से जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पाते हैं, ऐसे में कुछ उपायों को करके व्रत का फल प्राप्त किया जा सकता है। आइए जानते है इन उपायों के बारे में।
- Written By: सीमा कुमारी
जन्माष्टमी व्रत का फल पाने के लिए करें ये उपाय (सौ.सोशल मीडिया)
Janmashtami vrat Upay: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हिन्दू धर्म में बड़ा महत्व रखता है। इस पर्व की धूम मथुरा वृंदावन सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में देखा जाता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जाने-अनजाने में हुए पाप खत्म हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
लेकिन, कई बार भक्त स्वास्थ्य या निजी कारणों से जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पाते हैं, ऐसे में कुछ उपायों को करके व्रत का फल प्राप्त किया जा सकता है। ऐसे में आइए जानें पंडित ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय से अगर जन्माष्टमी व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो किन उपायों से व्रत का फल मिल सकता है।
जन्माष्टमी व्रत का फल पाने के लिए करें ये उपाय
पंडित जी के अनुसार, अगर किसी खास वजह से जन्माष्टमी व्रत इस बार नहीं कर पा रहे हैं तो किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भरपेट भोजन कराना चाहिए। अगर ऐसा करना संभव नहीं है तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को इतना धन का दान करें कि वह दो समय भरपेट भोजन कर सके।
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गायत्री मंत्र का करें जाप
अगर किसी खास वजह से जन्माष्टमी व्रत इस बार नहीं कर पा रहे हैं तो अगर ऐसा करना भी संभव नहीं है तो गायत्री मंत्र का 1000 बार जाप करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जन्माष्टमी व्रत का फल प्राप्त होता है।
पूजन सामग्री व पारण में लगने वाली सामग्री का दान
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, अगर जन्माष्टमी व्रत के नियमों का पालन करना व रखना संभव नहीं है तो व्रत करने वाले व्यक्ति को समस्त पूजन सामग्री व व्रत पारण में लगने वाली चीजों का दान करना चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण की विधिवत करें पूजा-अर्चना
पंडित जी बताते है कि, अगर कोई व्यक्ति किसी खास कारण से जन्माष्टमी व्रत करने में असमर्थ है, तो उसे जन्माष्टमी पूजन विधि-विधान से करना चाहिए। आधी रात को कृष्णजी के जन्म के बाद ही भोजन करना चाहिए।
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श्रीकृष्ण भगवान की भक्ति में रहें लीन
अगर जन्माष्टमी का व्रत नहीं कर पा रहे हैं तो, भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहना चाहिए और उनसे क्षमा मांगनी चाहिए और ‘हरे कृष्णा हरे कृष्णा, कृष्णा कृष्णा हरे हरे’ मंत्र का अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
