(सौजन्य सोशल मीडिया)
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि (Purnima) का बड़ा महत्व है। वर्ष में 12 बार पूर्णिमा तिथि आती हैं। ऐसे में हर महीने एक पूर्णिमा तिथि पड़ती है। आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि यानी ‘आषाढ़ पूर्णिमा’ इस साल (Ashadha Purnima 2024) 21 जुलाई को मनाई जाएगी।
इस दिन भगवान विष्णु की आराधना और स्नान-दान करने का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो जातक इस पवित्र दिन का उपवास रखते हैं और चंद्र देव को अर्घ्य देते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके साथ ही यह तिथि स्नान-दान के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। आइए जानते हैं आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि का व्रत कब रखा जाएगा और इसका महत्व-
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई शाम 5:55 पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 21 जुलाई दोपहर 3:45 पर होगा। हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के लिए उदया तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में आषाढ़ पूर्णिमा व्रत 21 जुलाई 2024, रविवार के दिन रखा जाएगा और इसके अगले दिन पवित्र सावन महीना शुरू हो जाएगा ।
आषाढ़ पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। स्नान के बाद सूर्यदेव को जल चढ़ाएं। फिर लक्ष्मी जी और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में चंदन और हल्दी का उपयोग करना शुभ होता है। इस दौरान ‘ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इसके बाद शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य दें। इससे जीवन में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।
सनातन धर्म में आषाढ़ पूर्णिमा को बहुत ही ख़ास एवं शुभ माना जाता है। इस दिन गुरु पूर्णिमा का त्योहार भी मनाया जाता है। आषाढ़ पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से और विष्णु जी की पूजा करने से साधक की सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसके साथ ही, इस दिन गुरु की भी पूजा की जाती है। गुरू की पूजा करने से व्यक्ति पर हमेशा गुरु की कृपा बनी रहती है।
शास्त्रों में यह बताया गया है कि जो व्यक्ति पूर्णिमा तिथि के दिन पूजा-पाठ और स्नान-दान करता है, उन्हें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और उनके सभी कष्ट दूर हो जाते है। साथ ही पिछले जन्म और इस जन्म में अज्ञानता वश किए गए पापों से भी मुक्ति मिल जाती है। इस विशेष दिन पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि जो व्यक्ति सामर्थ्य अनुसार, भोजन, वस्त्र या धन का दान करता है उसे देवी-देवताओं के साथ-साथ पितरों का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है और कई प्रकार के ग्रह दोष भी इससे दूर हो जाते हैं।
लेखिका- सीमा कुमारी