फाल्गुन पूर्णिमा (सौ. Gemini)
Phalgun Purnima Ka Vrat Kaise Karen:फाल्गुन मास की पूर्णिमा का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है। फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को होली पूर्णिमा और वसंत पूर्णिमा आदि के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह साल की आखिरी पूर्णिमा होती है।
फाल्गुन पूर्णिमा का इस शुभ एवं पावन तिथि पर जगत के पालनहार माने जाने वाले भगवान विष्णु और उनके अवतार नृसिंह देवता, धन की देवी माता लक्ष्मी और राधा-कृष्ण की विशेष पूजा, जप, तप, व्रत का विधान है।
फाल्गुन पूर्णिमा जिसे छोटी होली के नाम से भी जानते हैं, उस दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान की विधि-विधान से पूजा करने पर साधक को सभी सुख प्राप्त होते हैं।
ज्योतिष गणना के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा का पूर्णिमा तिथि 02 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 03 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 03 मार्च को चंद्र ग्रहण होने और सूतक लगने के कारण पूजा संभव नहीं होगी, इसलिए 02 मार्च 2026 को ही व्रत रखना शुभ माना गया है।
सनातन धर्म में पूर्णिमा का व्रत को बहुत ही शुभ फलदायी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि पूर्णिमा का व्रत करने और स्नान दान आदि करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा बनती है।
ऐसा कहा जाता है कि पूर्णिमा का व्रत करने से धन धान्य में कई गुना अधिक वृद्धि होती है। साथ ही अगर किसी की कुंडली में चंद्र दोष है तो वह भी इस व्रत को करते हैं तो मानसिक शांति मिलेगी। पूर्णिमा का व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान जरूर करना चाहिए। तभी जाकर व्रत का पूरा फल मिलता है।
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सनातन परंपरा में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा मानी जाती है। इस दिन विष्णु, उनके अवतार नृसिंह देवता, धन की देवी माता लक्ष्मी और राधा-कृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। विधि-विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।