Yakshinis (Source. Pinterest)
Hindu Tantra Vidya: हिंदू-तांत्रिक परंपरा में यक्षिणियाँ ऐसी दिव्य स्त्री-शक्तियाँ मानी जाती हैं, जो साधक को सिद्धि, धन, आकर्षण, ज्ञान और भौतिक सुख प्रदान कर सकती हैं। इनका उल्लेख प्रमुख रूप से उड्डामरेश्वर तंत्र, रुद्रयामल तंत्र और बृहत्तंत्रसार जैसे ग्रंथों में मिलता है। अलग-अलग तंत्रों में इनके नामों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन सामान्यतः आठ प्रमुख यक्षिणियाँ मानी जाती हैं।
अत्यंत रूपवती और दिव्य आभा से युक्त।
नाम के अनुसार मन को मोह लेने वाली।
स्वर्ण के समान चमकदार कांति वाली।
काम-शक्ति की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।
रति-भाव में प्रसन्न रहने वाली।
कमल के समान कोमल और शांत स्वरूप।
नृत्य-संगीत में पारंगत दिव्य नटी।
प्रेम और समर्पण से पूर्ण।
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यक्षिणी साधना प्रायः रात्रि, एकांत स्थान, श्मशान या विशेष वृक्ष जैसे पीपल या वट के नीचे की जाती है। अधिकांश तांत्रिक ग्रंथों में गुरु-दीक्षा के बिना इन साधनाओं को वर्जित बताया गया है। इनका उद्देश्य केवल भौतिक लाभ प्राप्त करना नहीं, बल्कि साधक की मानसिक दृढ़ता और आत्म-नियंत्रण की परीक्षा भी है।
प्रमुख आठ यक्षिणियाँ तांत्रिक परंपरा में शक्ति, प्रेम, धन और सिद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं। हालांकि, इनसे जुड़ी साधनाएँ अत्यंत गूढ़ और अनुशासनपूर्ण बताई गई हैं। इसलिए किसी भी आध्यात्मिक मार्ग पर चलने से पहले विवेक और सही मार्गदर्शन आवश्यक है।