

Eid-E-Milad Date 2026: ईद-ए-मिलाद, जिसे मिलाद-उन-नबी या मावलिद भी कहा जाता है, इस्लाम धर्म में पैगंबर मुहम्मद के जन्म की याद में मनाया जाने वाला त्योहार है। भारत समेत दुनिया के कई देशों में मुस्लिम समुदाय इस दिन को धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ मनाता है। हालांकि, चांद पर आधारित इस्लामिक कैलेंडर के कारण इसकी तारीख अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकती है।
ईद-ए-मिलाद का संबंध पैगंबर मुहम्मद के जन्म से है। ‘मावलिद’ का शाब्दिक अर्थ जन्म होता है। यह दिन उनके जीवन, शिक्षा और मानवता के प्रति दिए गए संदेश को याद करने का अवसर माना जाता है। इस दिन लोग पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनके बताए रास्ते पर चलने का विचार अपने जीवन में एकसार करते हैं। उनके संदेश में शांति, दया, करुणा, क्षमा, जरूरतमंद की मदद और आपसी भाईचारे जैसे मूल्यों पर जोर दिया जाता है। ईद-ए-मिलाद को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और अच्छे कर्मों से जुड़ा अवसर भी माना जाता है।
इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा की गति पर आधारित है। इसलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से चांद दिखने की परंपरा के आधार पर तारीख अलग हो सकती है। इसके अलावा, मुस्लिम समुदायों में भी ईद-ए-मिलाद मनाने की परंपरा एक जैसी नहीं है। कुछ समुदाय इसे 12 रबी-अल-अव्वल को मनाते हैं, जबकि कुछ परंपराओं में 17 रबी-अल-अव्वल को मनाया जाता है। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में तारीख को लेकर अंतर देखने को मिल सकता है।
लोग मस्जिदों में इबादत करते हैं और धार्मिक सभाओं में शामिल होते हैं।
धार्मिक विद्वानों द्वारा पैगंबर मुहम्मद के जीवन, उनके संघर्ष और शिक्षाओं के बारे में बताया जाता है।
कई जगहों पर पैगंबर के जीवन और संदेशों से जुड़े पाठ और तकरीर आयोजित की जाती हैं।
कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम समुदाय की ओर से जुलूस निकाला जाता है। हालांकि, यह परंपरा हर जगह नहीं होती।
इस अवसर पर गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना तथा दान-पुण्य करना भी कई समुदायों की परंपरा का हिस्सा है।
कई जगहों पर सामूहिक भोजन और मिलन समारोह आयोजित किए जाते हैं, जहां लोग एक-दूसरे के साथ खुशियां और भोजन दोनों शेयर करते हैं।
कई इलाकों में मस्जिदों, घरों और आसपास के स्थानों को रोशनी और सजावट से सजाया जाता है।
पैगंबर मोहम्मद साहब के अनुसार उन्हें अल्लाह ने शिक्षक या फिर सिखाने वाला बनाकर पृथ्वी पर भेजा है।
पैगंबर इस्लाम की सीख है कि हर इंसान इल्म यानि शिक्षा प्राप्त करे और यह शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिसमें व्यक्ति के चरित्र का निर्माण हो।
पैगंबर मोहम्मद साहब का संदेश है कि अगर तुम जमीन पर रहम करोगे तो आसमान वाला भी तुम पर रहम करेगा।
अल्लाह का संदेश है कि यदि किसी ने कोई पेड़ लगाया है, तो उसका जब तक इंसान और जानवर फायदा उठाएंगे उसका सवाब उस व्यक्ति को मिलता रहेगा।
अल्लाह का स्पष्ट संदेश है कि यदि कयामत आ जाए और तुम्हारे हाथ में कोई पौधा है तो उसे जमीन में लगा दो।
पैंगबर इस्लाम का संदेश है कि तुम अगर बहती हुई नदी के किनारे भी बैठे हो, तो वहां भी वज़ू आदि करते समय पानी को बेवजह बर्बाद न करो। इस तरह पानी की बर्बादी को गुनाह और पानी की बचत को सवाब माना गया है।
पैगंबर मोहम्मद साहब का संदेश है तुम्हारा मजहब तुम्हारे लिए है और हमारा मजहब हमारे लिए है यानी मुसलमान को सभी धर्मों की पुस्तक और सभी धर्मों की शख्सियत का ऐहतराम करना चाहिए।