दुर्योधन का वही भाई जिसने द्रौपदी के अपमान पर उठाई आवाज, परिवार के हुआ खिलाफ

Who was Vikarna: महाभारत की कथा में जहां अधिकांश कौरवों को अन्याय के पक्ष में खड़ा दिखाया गया है, वहीं एक ऐसा नाम भी सामने आता है जिसने सच्चाई का साथ देने की हिम्मत दिखाई।
brother of Duryodhana Vikarna who raised his voice against the humiliation of Draupadi
Vikarna (Source. Pinterest)
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Vikarna: The Kaurava Brother: महाभारत की कथा में जहां अधिकांश कौरवों को अन्याय के पक्ष में खड़ा दिखाया गया है, वहीं एक ऐसा नाम भी सामने आता है जिसने सच्चाई का साथ देने की हिम्मत दिखाई। यह नाम है विकर्ण दुर्योधन का वह भाई जिसने द्रौपदी चीर हरण के समय खुलकर विरोध किया था।

द्रौपदी चीर हरण पर किसने किया विरोध?

जब कौरव सभा में द्रौपदी का अपमान किया जा रहा था, तब अधिकांश लोग मौन थे। लेकिन उसी समय विकर्ण ने आगे बढ़कर इसका विरोध किया। विकर्ण ने साफ कहा कि:

  • एक स्त्री का इस तरह अपमान करना अधर्म है
  • यह पूरे कौरव वंश के विनाश का कारण बनेगा

उसकी बातों में सच्चाई थी, लेकिन सत्ता और अहंकार के आगे उसकी आवाज दबा दी गई।

सच्चाई जानकर भी क्यों नहीं बदला पक्ष?

हालांकि विकर्ण को सही और गलत का पूरा ज्ञान था, लेकिन जब महाभारत का युद्ध शुरू हुआ, तो उसने कौरवों का ही साथ दिया। यह स्थिति उसकी किंकर्तव्यविमूढ़ता को दर्शाती है एक तरफ धर्म की समझ, दूसरी तरफ परिवार के प्रति कर्तव्य। यही द्वंद्व उसे अंत तक कौरवों के साथ खड़ा रखता है।

भीम और विकर्ण का अंतिम युद्ध

महाभारत युद्ध के दौरान विकर्ण का सामना भीम से हुआ। युद्ध के समय भीम ने विकर्ण को समझाया:

  • वह अधर्म का साथ छोड़ दे
  • युद्ध से पीछे हट जाए

लेकिन विकर्ण ने जवाब दिया कि:

  • वह जानता है कि द्रौपदी के अपमान के बाद कौरवों की हार तय है
  • फिर भी वह अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटेगा

अंततः भीम को मजबूरी में विकर्ण का वध करना पड़ा।

जिसकी मौत पर पांडव भी रो पड़े

विकर्ण एकमात्र कौरव था, जिसकी मृत्यु के बाद पांडवों को भी गहरा दुख हुआ क्योंकि: Vikarna

  • वह सच्चाई का समर्थक था
  • उसने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई
  • फिर भी परिस्थितियों के कारण गलत पक्ष में खड़ा रहा

क्या सीख मिलती है विकर्ण की कहानी से?

विकर्ण की कहानी हमें यह सिखाती है कि सिर्फ सही को पहचानना ही काफी नहीं, बल्कि सही के साथ खड़ा होना भी जरूरी है। कई बार परिस्थितियां हमें मजबूर कर देती हैं, लेकिन इतिहास हमेशा उसी को याद रखता है जो सच का साथ देता है।

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