Durga Saptashati Path Vidhi: शारदीय नवरात्र में कैसे करें दुर्गा सप्तशती का पाठ? जानें नियम, विधि और महत्व

Durga Saptashati Path: शारदीय नवरात्र में दुर्गा सप्तशती के पाठ का विशेष महत्व माना जाता है। जानिए पाठ की सही विधि, दुर्गा कवच का महत्व, पूजा सामग्री और किन नियमों का पालन करना चाहिए।
Durga Saptashati Path
दुर्गा सप्तशती पाठ(सौ. एआई जनरेटेड इमेज)
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  • दुर्गा सप्तशती पाठ से मिलती है साहस और आध्यात्मिक शक्ति

  • नवरात्रि में जानें दुर्गा सप्तशती पाठ की सही विधि

  • दुर्गा सप्तशती पाठ के दौरान इन नियमों का रखें ध्यान

Durga Saptashati Path Vidhi Rules: सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि महापर्व को काफी विशेष माना जाता है। 9 दिनों तक चलने वाले दुर्गा पूजा के शुभ अवसर को पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से होने वाली है।

शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इन 9 दिनों में घरों और मंदिरों में विशेष रुप से दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि दुर्गा सप्तसती का रोजाना पाठ करने से साहस, आध्यात्मिक सुरक्षा और समृद्धि प्राप्त होती है।

विधि-विधान के साथ करें दुर्गा सप्तशती का पाठ

दुर्गा सप्तशती को 'देवी माहात्म्य' या 'चंडी पाठ' भी कहा जाता है। यह मार्कंडेय पुराण का एक भाग है, जिसकी रचना महर्षि वेदव्यास ने की है। इस ग्रंथ में 13 अध्याय और 700 श्लोक हैं। 'सप्त' का अर्थ है 'सात' और 'शत' का अर्थ है 'सौ', इसलिए 'सप्तशती' कहा जाता है। इस ग्रंथ में महिषासुर जैसे राक्षसों पर दुर्गा की विजय का वर्णन है। सही पाठ के लिए विशिष्ट विधि का पालन किया जाता है, जिसमें त्र्यंगम और नवांगम शामिल हैं, जिनका नवरात्र के दौरान या एक, तीन या सात बैठकों में श्रद्धापूर्वक पाठ किया जाता है।

घर में सुख-शांति के लिए होता है दुर्गा सप्तशती का पाठ

धार्मिक मान्यता मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का प्रतिदिन या नवरात्रि के दौरान पाठ करने से अनेक आध्यात्मिक और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त होते हैं। पवित्र श्लोक भक्ति, साहस और आंतरिक शक्ति को प्रेरित करते हैं और नकारात्मकता से सुरक्षा का बोध कराते हैं। घर में सुख-शांति बनाए रखने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने के लिए भी इस पाठ को किया जाता है।

शुद्धता के साथ करे दुर्गा सप्तशती का पाठ

दुर्गा सप्तशती का पाठ विधि-विधान और शुद्धता के साथ करना चाहिए। आप इसे नवरात्र या किसी अन्य शुभ अवसर पर एक दिन में या नौ दिनों में पूरा कर सकते हैं। दुर्गा सप्तशती का सही पाठ करने के लिए एक पारंपरिक पाठ विधि का पालन करना आवश्यक है। भक्त समय, श्रद्धा और अवसर के अनुसार विभिन्न विधियों में से किसी एक को चुन सकते हैं। यदि आपको एक ही बार में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने में सहायता की आवश्यकता है, तो आप दो विधियों का पालन कर सकते हैं: त्र्यंगम और नवांगम।

मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें

पवित्र ग्रंथ का सही पाठ करने के लिए उचित विधि का पालन करना आवश्यक है। पूर्व दिशा में लाल वस्त्र बिछाकर उस पर मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से पहले स्थान को शुद्ध करें और कुमकुम, चावल और फूलों से प्रार्थना करें। फिर माथे पर रोली लगाएं और तत्वों को शुद्ध करने के लिए चार बार आचमन करें।

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दुर्गा कवच का करें पाठ

पाठ शुरू करने से पहले स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। माता दुर्गा का ध्यान करते हुए दुर्गा सप्तशती का पाठ आरंभ करें। सबसे पहले दुर्गा कवच का पाठ करें। मान्यता है कि दुर्गा कवच का पाठ किए बिना सप्तशती पाठ आरंभ नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही माता दुर्गा की तस्वीर के सामने दीया जलाएं। नियमित पाठ पूरा होने पर आरती अवश्य करें और माता दुर्गा से क्षमा याचना करें। आरती के बाद भोग या प्रसाद चढ़ाएं। माता दुर्गा को बताशे का भोग लगाना बहुत शुभ माना जाता है। आरती के बाद प्रसाद वितरण करें और माता से घर की खुशहाली की प्रार्थना करें।

शारीरिक व मानसिक पवित्रता का रखे ध्यान

श्री दुर्गा सप्तशती पाठ की पुस्तक को हमेशा लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें। पाठ के दिनों में मांसाहारी भोजन, शराब, लहसुन और प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए। पाठ के दौरान पूर्ण ब्रह्मचर्य और शारीरिक व मानसिक पवित्रता का पालन करें। सप्तशती पाठ करते समय किसी के प्रति बुरे भाव न रखें।

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