शनि के प्रकोप से क्या सही में बचाती है लोहे की अंगूठी? जानिए क्या कहता है ज्योतिष विज्ञान
Shani Dhaiya Upay: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि ग्रह का संबंध लोहे से माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सही विधि से लोहे की अंगूठी धारण करने से शनि के नकारात्मक प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी
शनि देव(सौ.सोशल मीडिया)
Shani Dosha Remedies: आपने देखा होगा कि कई लोग अपनी उंगली में लोहे का छल्ला या रिंग पहने रहते हैं। आमतौर पर इसके पीछे केवल फैशन नहीं, बल्कि ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी होती हैं। ज्योतिष शास्त्र में लोहे के छल्ले या कहें कि अंगूठी का विशेष महत्व बताया गया है। लोहा शनि देव से संबंधित धातु होती है।
लोग इसकी अंगूठी जरूर पहनते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लोहे की अंगूठी पहनने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है, लेकिन धर्म शास्त्रों में लोहे की अंगूठी धारण करने के कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है।
शनि और लोहे का क्या है संबंध?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जैसा कि आप सभी जानते है कि, हर धातु का संबंध किसी न किसी ग्रह से होता है। लोहे पर शनि देव का आधिपत्य माना गया है। कहा जाता है कि जब हम लोहे की अंगूठी पहनते हैं, तो यह शनि की ऊर्जा को आकर्षित और संतुलित करने का काम करती है।
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लोहे की अंगूठी शरीर में शनि के नकारात्मक प्रभाव को सोख लेती है और व्यक्ति को मानसिक व शारीरिक शांति प्रदान करती है।
लोहे की अंगूठी धारण करने का क्या है सही तरीका और नियम
शनि के शुभ प्रभाव प्राप्त करने के लिए लोहे की अंगूठी को सही विधि से धारण करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
धारण करने का दिन
लोहे की अंगूठी हमेशा शनिवार (Saturday) के दिन ही धारण करनी चाहिए। यह शनि देव का दिन है और इस दिन यह सबसे अधिक प्रभावशाली होती है।
सही उंगली
पुरुषों को यह अंगूठी अपने दाएं हाथ की मध्यमा उंगली (Middle Finger) में पहननी चाहिए। मध्यमा उंगली शनि ग्रह से संबंधित मानी जाती है। महिलाएं इसे अपने बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में पहन सकती हैं।
धातु की शुद्धता
यह सुनिश्चित करें कि अंगूठी शुद्ध लोहे से बनी हो। इसमें कोई अन्य धातु मिश्रित न हो। काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी अंगूठी विशेष रूप से शुभ मानी जाती है।
पहनावे से पहले की तैयारी
- शुद्धिकरण: शनिवार की शाम को अंगूठी को गंगाजल, कच्चे दूध या पंचामृत से अच्छी तरह धोकर शुद्ध कर लें।
- मंत्र जाप: इसे किसी साफ स्थान पर रखकर “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- शनि देव को अर्पित करें: जाप के बाद इसे शनि देव के चरणों में या उनकी प्रतिमा के पास कुछ देर के लिए रख दें।
शनिवार की शाम को धारण करें: सूर्यास्त के बाद या रात्रि में शुभ मुहूर्त देखकर इसे धारण करें।
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इन बातों का रखें ख़ास ख्याल
- अंगूठी धारण करने के बाद किसी भी प्रकार का अनैतिक कार्य न करें।
- मांस-मदिरा का सेवन करने से बचें।
- अंगूठी को गंदा न होने दें और नियमित रूप से उसकी सफाई करते रहें।
इन नियमों का पालन करते हुए लोहे की अंगूठी धारण करने से शनि के बुरे प्रभावों को कम किया जा सकता है और व्यक्ति के जीवन में स्थिरता, शांति और सफलता आ सकती है। हालांकि, किसी भी ज्योतिषीय उपाय को अपनाने से पहले एक योग्य ज्योतिषी से सलाह लेना हमेशा उचित होता है।
