‘गंगा सप्तमी’ के दिन गंगा जी में भूल से भी न डालें ये वस्तुएं, लग जाएगा ग्रहदोष
कहते हैं कि इस दिन मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना और गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। इसके साथ ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए ।
- Written By: सीमा कुमारी
गंगा सप्तमी में न करें ये गलतियां (सौ.सोशल मीडिया)
Ganga Saptami 2025: मां गंगा को समर्पित गंगा सप्तमी का पावन पर्व इस बार आगामी 03 मई को मनाई जाएगी। सनातन धर्म में गंगा सप्तमी का बड़ा महत्व है। यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, इसी दिन गंगा जी की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इसे गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है। गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की विशेष रूप से पूजा का विधान है।
कहते हैं कि इस दिन मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना और गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। इसके साथ ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन हर किसी को करना चाहिए, तो आइए उनके बारे में जानते हैं।
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गंगा सप्तमी में न करें ये गलतियां
पूजा सामग्री न करें प्रवाहित
गंगा सप्तमी के दिन किसी भी प्रकार की पूजा सामग्री गंगा नदी में न डालें। ये सही नहीं होता है। ऐसा करने पर व्यक्ति को ग्रह दोष का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए गलती से भी मां गंगा में पूजा की पुरानी सामग्री अर्पित न करें।
गंगा सप्तमी के दिन गंगा में अस्थियां नहीं डालनी चाहिए
गंगा सप्तमी का दिन पूजा-पाठ, स्नान आदि का दिन होता है। ऐसे में अगर आप ऐसी वस्तुएं इस दिन गंगा नदी में डालते हैं तो इसका परिणाम अच्छा नहीं होता। आपको हमेशा तिथि देखकर ही अस्थियों को गंगा नदी में विसर्जित करना चाहिए। लेकिन गंगा सप्तमी के दिन ये काम न करें।
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भूलकर भी न डालें ये अशुद्ध वस्तुएं
अक्सर लोग पवित्र नदी गंगा में स्नान करने जाते हैं लेकिन नदी में कभी पुराने कपड़े, शैम्पू की बोतल, साबुन, पॉलिथीन, प्लास्टिक बॉटल छोड़ देते हैं। कई लोग ये बात नहीं जानते हैं कि जो वस्तुएं स्नान के दौरान हमारे हाथ से गंगा नदी में जाती हैं, उसे भी अर्पण के रूप में माना गया है। ऐसे में अगर आप ये अशुद्ध वस्तुएं गंगा नदी में डालते हैं तो इससे आपको नुकसान पहुंच सकता है और घर में अशांति बढ़ सकती है।
