1 नवंबर को मनाई जाएगी दिवाली (सौ.सोशल मीडिया)
मुंबई: हिंदू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में दिवाली का पर्व खास होता है जिसका सभी लोगों को बेसब्री से इंतजार रहता है. इस शुभ दिन पर देशभर में खास रौनक देखने को मिलती है. हर साल यह पर्व भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण 14 वर्ष वनवास बिताने के बाद अयोध्या लौटने की खुशी में मनाया जाता है. इस दिन धन की देवी मां लक्ष्मी के संग राम परिवार के पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। दिवाली कब मनाई जाएगी इसे लेकर इस साल कंफ्यूजन हो रहा है लेकिन हाल ही में ज्योतिर्विद ने इस शंका को शांत किया है। इसके अनुसार दिवाली का यह त्योहार इस बार 5 दिनों का नहीं बल्कि 6 दिनों का होगा।
यहां पर दिवाली को लेकर मान्यता है कि उपासना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन लाभ के योग बनते हैं वही पर इस दिन दीपक जलाएं जाते हैं। कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर को दोपहर 03.52 बजे शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 1 नवंबर को संध्याकाल 06.16 बजे होगा। ऐसे में 1 नवंबर को दिवाली मनाई जाएगी. वहीं दूसरी ओर कुछ स्थानों पर 31 अक्टूबर को तो कुछ मंदिरों में 1 नवंबर को दिवाली पूजा किया जाएगा। ऐसे में दिवाली को लेकर मतभेद बढ़ गया है। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महासचिव आचार्य कृष्णदत्त शर्मा ने बताया कि 100 वर्ष पुराने वेंकटेश्वर पंचांग, जिसे शताब्दी पंचांग कहा जाता है। उसमें 81 वर्ष पहले एक नवंबर को दिवाली मनाने का उल्लेख किया गया है. ऐसे में इस साल दिवाली 5 नहीं, बल्कि 6 दिन तक दिवाली मनाई जाएगी.
दिवाली को लेकर काशी के प्रसिद्ध ज्योतिर्विद डॉ. बालकृष्ण मिश्र ने बताया कि काशी के पंचांग को छोड़कर सभी दूसरे पंचांगों में एक नवंबर को दीवाली की तारीख का उल्लेख किया गया है, इसलिए 1 नवंबर को दिवाली पूजन किया जाएगा। इस बार कार्तिक अमावस्या दो दिन तक रहेगी, 31 अक्टूबर 2024 के दिन चतुर्दशी समाप्ति 15.53 बजे होगा चतुर्दशी समाप्ति के बाद अमावस्या शुरू होकर दूसरे दिन 1 नवंबर को सायं 18.17 को अमावस्या समाप्ति हो रही है। 31 अक्टूबर को प्रदोषकाल में अमावस्या की अधिक व्याप्ति है और दूसरे दिन 1 नवंबर को प्रदोषकाल में अमावस्या अल्पकाल है, फिर भी 1 नवंबर को लक्ष्मी पूजन करना ही उचित है।
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यहां पर बात करें तो, इस बार दीपावली का पर्व 6 दिनों का है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज पर यह त्योहार खत्म हो जाता है। धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। यहां पर बात करें तो, धनतेरस के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा अर्चना की जाएगी और इस त्योहार के अगले दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान धन्वंतरि की पूजा उपासना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति ऊर्जावान रहता है. इस साल धनतेरस का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
दिवाली का सेलिब्रेशन कब (सौ.सोशल मीडिया)
1 नवंबर को मां लक्ष्मी की पूजा करने का शुभ मुहूर्त संध्याकाल 05.36 बजे से लेकर 06.16 बजे तक है. इस दौरान श्रद्धालु मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा कर सकते हैं.
29 अक्टूबर को गोधूलि काल शाम 6.31 बजे से शुरू होकर रात 8.31 बजे तक रहेगा. धनतेरस की पूजा के लिए भक्तों को 1 घंटा 42 मिनट का समय मिलेगा।