Maa Baglamukhi Chalisa: कोर्ट-कचहरी हो या व्यापार, हर जगह मिलेगी जीत, बस करें मां बगलामुखी चालीसा का पाठ

Maa Baglamukhi Puja: मां बगलामुखी चालीसा का पाठ करने से शत्रुओं पर विजय और कोर्ट-कचहरी या व्यापार से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।
Maa Baglamukhi Puja
मां बगलामुखी(सौ. Gemini)
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Maa Baglamukhi Chalisa Path: हिंदू धर्म में मां बगलामुखी का बहुत महत्व है। उन्हें दस महाविद्याएं में आठवीं महाविद्या के रूप में जाना जाता है, जो माता शक्ति के दस दिव्य रूपों में से एक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बगलामुखी शत्रुओं को परास्त करने वाली और नकारात्मक शक्तियों को शांत करने वाली देवी मानी जाती हैं।

मान्यता है कि जिस व्यक्ति को शत्रुओं का भय, बाधाएं या अज्ञात डर सताता है, यदि वह श्रद्धा से मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना करता है तो उसके जीवन से भय दूर होने लगता है। मां बगलामुखी की साधना से व्यक्ति को आत्मबल, साहस और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।

मां बगलामुखी चालीसा पाठ का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो व्यक्ति प्रतिदिन मां बगलामुखी चालीसा का पाठ करता है, उसके शत्रु उस पर हावी नहीं हो पाते। नियमित पाठ से व्यक्ति के अंदर साहस, पराक्रम और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है। साथ ही जीवन में आने वाली बाधाएं भी धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

ऐसे में मां बगलामुखी चालीसा का पाठ विशेष रूप से शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। आइए जानते हैं मां बगलामुखी चालीसा का महत्व, पाठ करने की सही विधि और इसके लाभ।

श्री माँ बगलामुखी चालीसा

       दोहा

नमो महाविधा वरदा, बगलामुखी दयाल।

स्तम्भन क्षण में करे, सुमरित अरिकुल काल॥

      चौपाई

नमो नमो पीताम्बरा भवानी,

बगलामुखी नमो कल्यानी॥

भक्त वत्सला शत्रु नशानी,

नमो महाविधा वरदानी॥

अमृत सागर बीच तुम्हारा,

रत्न जड़ित मणि मंडित प्यारा।

स्वर्ण सिंहासन पर आसीना,

पीताम्बर अति दिव्य नवीना॥

स्वर्णभूषण सुन्दर धारे,

सिर पर चन्द्र मुकुट श्रृंगारे।

तीन नेत्र दो भुजा मृणाला,

धारे मुद्गर पाश कराला॥

भैरव करे सदा सेवकाई,

सिद्ध काम सब विघ्न नसाई।

तुम हताश का निपट सहारा,

करे अकिंचन अरिकल धारा॥

तुम काली तारा भुवनेशी,

त्रिपुर सुन्दरी भैरवी वेशी।

छिन्नभाल धूमा मातंगी,

गायत्री तुम बगला रंगी॥

सकल शक्तियाँ तुम में साजें,

ह्रीं बीज के बीज बिराजे।

दुष्ट स्तम्भन अरिकुल कीलन,

मारण वशीकरण सम्मोहन॥

दुष्टोच्चाटन कारक माता,

अरि जिव्हा कीलक सघाता।

साधक के विपति की त्राता,

नमो महामाया प्रख्याता॥

मुद्गर शिला लिये अति भारी,

प्रेतासन पर किये सवारी।

तीन लोक दस दिशा भवानी,

बिचरहु तुम हित कल्यानी॥

अरि अरिष्ट सोचे जो जन को,

बुध्दि नाशकर कीलक तन को।

हाथ पांव बाँधहु तुम ताके,

हनहु जीभ बिच मुद्गर बाके॥

चोरो का जब संकट आवे,

रण में रिपुओं से घिर जावे।

अनल अनिल बिप्लव घहरावे,

वाद विवाद न निर्णय पावे॥

मूठ आदि अभिचारण संकट,

राजभीति आपत्ति सन्निकट।

ध्यान करत सब कष्ट नसावे,

भूत प्रेत न बाधा आवे॥

सुमरित राजव्दार बंध जावे,

सभा बीच स्तम्भवन छावे।

नाग सर्प ब्रर्चिश्रकादि भयंकर,

खल विहंग भागहिं सब सत्वर॥

सर्व रोग की नाशन हारी,

अरिकुल मूलच्छाटन कारी।

स्त्री पुरुष राज सम्मोहक,

नमो नमो पीताम्बर सोहक॥

तुमको सदा कुबेर मनावे,

श्री समृद्धि सुयश नित गावें।

शक्ति शौर्य की तुम्हीं विधाता,

दुःख दारिद्र विनाशक माता॥

यश ऐश्वर्य सिद्धि की दाता,

शत्रु नाशिनी विजय प्रदाता।

पीताम्बरा नमो कल्यानी,

नमो माता बगला महारानी॥

जो तुमको सुमरै चितलाई,

योग क्षेम से करो सहाई।

आपत्ति जन की तुरत निवारो,

आधि व्याधि संकट सब टारो॥

पूजा विधि नहिं जानत तुम्हरी,

अर्थ न आखर करहूँ निहोरी।

मैं कुपुत्र अति निवल उपाया,

हाथ जोड़ शरणागत आया॥

जग में केवल तुम्हीं सहारा,

सारे संकट करहुँ निवारा।

नमो महादेवी हे माता,

पीताम्बरा नमो सुखदाता॥

सोम्य रूप धर बनती माता,

सुख सम्पत्ति सुयश की दाता।

रोद्र रूप धर शत्रु संहारो,

अरि जिव्हा में मुद्गर मारो॥

नमो महाविधा आगारा,

आदि शक्ति सुन्दरी आपारा।

अरि भंजक विपत्ति की त्राता,

दया करो पीताम्बरी माता॥

         दोहा

रिद्धि सिद्धि दाता तुम्हीं, अरि समूल कुल काल।

मेरी सब बाधा हरो, माँ बगले तत्काल॥

॥ इति श्री माँ बगलामुखी चालीसा पाठ समाप्त ॥

मां बगलामुखी चालीसा के पाठ के प्रमुख लाभ

  • शत्रु बाधा का नाश: देवी शत्रुओं की शक्ति को स्तंभित (ठप) कर देती हैं, जिससे वे हानि नहीं पहुँचा पाते।
  • कानूनी मामलों में सफलता: न्यायालयीन वादों, विवादों और मुकदमों में जीत के लिए यह अत्यंत कारगर मानी जाती है।
  • नकारात्मकता से रक्षा: यह बुरी नजर, तंत्र-मंत्र और अज्ञात भय से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • सफलता और समृद्धि: कार्यक्षेत्र में सफलता, आत्मविश्वास में वृद्धि और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
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