Bahula Chauth Ki Katha: बहुला चौथ पर गाय-बछड़े की पूजा क्यों होती है? जानिए बहुला गाय की पौराणिक कथा

Bahula Chaturthi: बहुला चौथ के व्रत पर गाय-बछड़े की पूजा की खास परंपरा है। जानिए बहुला गाय से जुड़ी पौराणिक कथा और इस दिन दूध से बनी चीजें न खाने की धार्मिक मान्यता।
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बहुला चौथफोटो.सोशल मीडिया
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Bahula Chauth 2026: बहुला चौथ यानी बहुला चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा व आराधना की जाती है, इस के साथ-साथ गाय और बछड़े की भी पूजा की जाती है। इस दिन माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। लेकिन इस व्रत की सबसे खास परंपरा गाय-बछड़े की पूजा से जुड़ी है। इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है। जानिए बहुला व्रत की पौराणिक कथा के बारे में

बहुला गाय के नाम पर पड़ा ‘बहुला चौथ’

धार्मिक कथाओं के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी या बहुला चौथ मनाया जाता है, जो माताएं अपने बच्चों के लिए करती हैं। इस दिन भगवान गणेश के साथ बहुला नाम की गाय और उसके बछड़े की पूजा का भी विधान है। इसी वजह से इस चतुर्थी का नाम बहुला चौथ पड़ा।

बहुला गाय की पौराणिक कथा

कथा के अनुसार, बहुला नाम की एक धर्मपरायण गाय थी। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण ने उसकी सत्यनिष्ठा और वचन के प्रति समर्पण की परीक्षा लेने का विचार किया। उन्होंने सिंह का रूप धारण कर बहुला को रोक लिया। सिंह को देखकर बहुला गाय डर गई, लेकिन उसने सिंह रूपी श्रीकृष्ण से विनती करते हुए कहा कि उसका बछड़ा भूखा है। वह पहले अपने बछड़े को दूध पिलाना चाहती है और इसके बाद वापस लौटकर स्वयं को सिंह को सौंप देगी।

बहुला ने अपने वचन का पालन किया और बछड़े को दूध पिलाने के बाद वापस लौट आई। उसकी सत्यनिष्ठा और वचन निभाने की भावना से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया। इसी कथा से बहुला चौथ की शुरुआत हुई।

इस दिन गाय-बछड़े की पूजा का महत्व

बहुला चौथ पर गाय और बछड़े की पूजा को मातृत्व, करुणा, वचन की प्रतिबद्धता और संतान के प्रति प्रेम से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि गौ पूजा के माध्यम से संतान की सुख-समृद्धि और सुरक्षा की कामना की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं गाय-बछड़े की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर भी पूजा करती हैं।

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दूध से बनी चीजें क्यों नहीं खाती हैं महिलाएं?

बहुला चौथ की एक खास परंपरा यह भी है कि इस दिन गाय के दूध से बनी चीजों का सेवन नहीं किया जाता। माना जाता है कि इस दिन गाय के दूध पर केवल उसके बछड़े का अधिकार होता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं दूध और उससे बनी चीजों से परहेज करती हैं।

संतान की खुशहाली से जुड़ा है व्रत

बहुला चौथ का व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, तरक्की और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। इस दिन शाम के समय पूजा की जाती है और इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है।

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