

Bahula Chaturthi Today : आज 31 अगस्त को कजरी तीज के साथ बहुला चतुर्थी का व्रत भी रखा जा रहा है। बहुला चतुर्थी पर माताएं अपने संतान की रक्षा, सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रहती हैं। इस पर्व में भगवान गणेश के साथ भगवान श्रीकृष्ण और गौ माता की पूजा करने की भी खास परम्परा भी है। कब है बहुला चतुर्थी, पूजा का मुहूर्त और महत्व यहां जानिए सबकुछ
पंचांग के अनुसार, इसवर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 31 अगस्त को सुबह 8 : 52 मिनट पर होकर 01 सितंबर को सुबह 7 : 42 मिनट पर होगा। ऐसे में यह पर्व आज 31 अगस्त को मनाया जा रहा हैं। इस दिन चंद्रदेव की विशेष पूजा करने का विधान होता है।
हिन्दू पंचांग के अनुसार, आज बहुला चतुर्थी की शाम को चंद्रोदय का समय रात 08 बजकर 28 मिनट पर होगा। जिसमें व्रती चंद्र दर्शन और अर्घ्य देकर व्रत को पूरा करेंगी।
अमृत चौघड़िया- सुबह 5 बजकर 58 मिनट से 7 बजकर 34 मिनट तक
शुभ चौघड़िया- सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक
लाभ चौघड़िया- दोपहर में 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 8 मिनट तक
अमृत चौघड़िया- शाम को 5 बजकर 8 मिनट से 6 बजकर 44 मिनट तक
चंद्रोदय का समय- रात में 8 बजकर 29 मिनट पर की शाम को चंद्रोदय का समय रात 08 बजकर 28 मिनट पर होगा। जिसमें व्रती चंद्र दर्शन और अर्घ्य देकर व्रत को पूरा करेंगी।
यह शुभ दिन भगवान गणेश, श्रीकृष्ण और गौमाता की पूजा के लिए विशेष माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण और गणेशजी के साथ गाय-बछड़े की पूजा करने से संतान सुख की कामना पूरी होती है। मान्यता है कि बहुला चौथ का व्रत संतान की सुख-समृद्धि और परिवार में खुशहाली के लिए भी फलदायी होता है।
इस दिन प्रातः जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और शाम के समय गाय और बछड़े की पूजा करती हैं।
पूजा के लिए घर में विभिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं, जिन्हें भगवान गणेश और श्रीकृष्ण को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।
इसके बाद यह भोग गाय और बछड़े को खिलाया जाता है।
पूजा के बाद दाएं हाथ में चावल के दाने लेकर बहुला चौथ की कथा सुननी चाहिए।
कथा श्रवण के बाद गाय और बछड़े की प्रदक्षिणा करें और परिवार में सुख-शांति तथा संतान की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें।