Zero Temple India: भारत के इस मंदिर में आज भी सुरक्षित है दुनिया के सबसे पुराने शून्य का प्रतीक

Zero In India: ग्वालियर का चतुर्भुज मंदिर को जीरो टेंपल के नाम से जाना जाता है। आइए जानते है, कैसे इस प्राचीन मंदिर की दीवार पर दर्ज शून्य का प्रतीक गणित के इतिहास में छिपा है।
Chaturbhuj temple gwalior zero temple history india
जीरो टेंपलफोटो.सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Gwalior Zero Temple: शून्य को मानव इतिहास की सबसे बौद्धिक उपलब्धियों में से एक माना जाता है। आज आधुनिक कंप्यूटिंग, इंजीनियरिंग, वित्त और अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर गणित की बेसिक गिनती तक में शून्य की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

शून्य की अवधारणा का विकास प्राचीन भारत में कई सदियों के दौरान हुआ, लेकिन इसका लिखित प्रतीक आज भी किसी म्यूजियम में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के ग्वालियर में स्थित एक प्राचीन मंदिर की दीवार पर देखने को मिलता है। इसी वजह से चतुर्भुज मंदिर को जीरो टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में मौजूद एक शिलालेख में गोलाकार शून्य देखने को मिलता है।

कहां है भारत का ‘Zero Temple’?

चतुर्भुज मंदिर मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक ग्वालियर किले के परिसर में स्थित है। ग्वालियर का यह विशाल पहाड़ी किला भारत के प्रमुख ऐतिहासिक दुर्गों में गिना जाता है।

9वीं शताब्दी में बना चतुर्भुज मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बावजूद यह मंदिर अपनी एक खास गणितीय विरासत के कारण दुनिया भर में चर्चित है।

चतुर्भुज मंदिर को जीरो टेंपल क्यों कहा जाता है?

मंदिर की दीवार पर मौजूद एक प्राचीन शिलालेख में गोलाकार शून्य के प्रतीक का उल्लेख मिलता है। यही वजह है कि इस मंदिर को शून्य के इतिहास से जोड़कर देखा जाता है। यह शिलालेख उस दौर की गणितीय समझ की झलक देता है, जब भारतीय गणितज्ञों ने संख्या और गणना को विकसित किया। आज इस जीरो का प्रभाव पूरी दुनिया के गणित पर है।

शून्य ने गणित को कैसे बदला?

आज शून्य को सिर्फ एक संख्या या किसी अन्य संख्या के साथ देखना आसान है। Place Value System में शून्य के इस्तेमाल ने बड़ी संख्याओं को लिखना और उनके साथ जोड़-घटाव को करना आसान बना दिया।

आगे चलकर यही गणितीय प्रणाली विज्ञान, खगोल विज्ञान, इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक के विकास की आधारशिला बनी। आज कंप्यूटर की बाइनरी सिस्टम से लेकर डिजिटल तकनीक तक, शून्य की भूमिका बेहद अहम है।

Chaturbhuj temple gwalior zero temple history india
Cigarette Offering to Lord Shiva: इस मंदिर में महादेव को चढ़ाई जाती है सिगरेट, जानें क्यों है यह अनोखी परंपरा

ग्वालियर का यह मंदिर क्यों है खास?

चतुर्भुज मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीन वास्तुकला या धार्मिक इतिहास तक सीमित नहीं है। यह भारत की मैथेमेटिकल हेरीटेज का हिस्सा है। मंदिर की दीवार पर मौजूद शिलालेख इस बात की याद दिलाता है कि प्राचीन भारत में गणित और खगोल विज्ञान जैसे विषयों पर कितनी बारीकी और गूढ़ता से काम किया गया था।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com