बसंत पंचमी के दिन ‘इन’ विशेष मंत्रों का करें पाठ, करियर की समस्त अड़चनें हो जाएंगी छू मंतर
मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, बंसत पंचमी पर मां सरस्वती के विशेष मंत्रों का जाप करने से छात्रों को करियर में अपार सफलता मिल सकती है।
- Written By: सीमा कुमारी
मां सरस्वती, (सौ.सोशल मीडिया)
Basant Panchami 2025: ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का पावन पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। बसंत पंचमी का पर्व मुख्य रूप से भारत के पूर्वी हिस्सों में, विशेषकर पश्चिम बंगाल और बिहार में बहुत ही धूमधाम एवं हर्षोल्लास से मनाया जाता है। वहीं, उत्तर भारत में यह पतंगों के त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
बसंत पंचमी का पर्व वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक भी है। यह त्योहार माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस साल बसंत पंचमी का पर्व 2 फरवरी 2025 को मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, बंसत पंचमी पर मां सरस्वती के विशेष मंत्रों का जाप करने से छात्रों को करियर में अपार सफलता मिल सकती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन से हैं वो मंत्र –
बसंत पंचमी के दिन करें इन मंत्रों का जाप
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ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
ॐ ऐं नमः
ॐ ऐं क्लीं सौः
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी, वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा.
सरस्वती पुराणोक्त मन्त्र – या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
सरस्वती गायत्री मन्त्र – ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि तन्नो देवी प्रचोदयात्
महासरस्वती मन्त्र – ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः
सरस्वती दशाक्षर मन्त्र – वद वद वाग्वादिनी स्वाहा
सरस्वती एकाक्षर बीज मन्त्र – ऐं
सरस्वती द्व्यक्षर मन्त्र – ऐं लृं
सरस्वती त्र्याक्षर मन्त्र – ऐं रुं स्वों
जानिए क्यों मनाई जाती है वसंत पंचमी
आपको बता दें, बसंत पंचमी का पावन त्योहार मां सरस्वती के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती प्रकट हुई थी। पौराणिक कथा के अनुसार, जब ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना कर रहे थे, तो उन्होंने सबसे पहले जीवों और मनुष्यों की रचना की।
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लेकिन, वातावरण इतना शांत था कि सब कुछ सुनसान लग रहा था। तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की अनुमति से अपने कमंडल से पृथ्वी पर थोड़ा-सा जल छिड़का। इससे हाथ में वीणा धारण किए हुए देवी सरस्वती प्रकट हुईं। इसलिए इस तिथि पर बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाने लगा।
