चैती छठ की आ गई सबसे सटीक तिथि, जानिए नहाय-खाय से पारण तक के मुहूर्त

Nahay Khay Chaiti Chhath : चैती छठ की सबसे सटीक तिथि घोषित हो गई है। इस पावन पर्व में नहाय-खाय से लेकर खरना, संध्या अर्घ्य, उषा अर्घ्य और पारण तक के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है।
Chaiti Chhath 2026
चैती छठ (सौ. AI)
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Chaiti Chhath 2026: 4 मार्च से चैत्र महीने की शुरुआत हो रही है। हिन्दू धर्म में चैत्र महीने का बड़ा महत्व होता है। इस महीने में कई व्रत-त्योहार पड़ते है जिसका अपना अलग ही महत्व है। इन्ही में से एक चैती छठ भी। चैती छठ लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व है। जो साल में दो बार मनाया जाता है। एक बार चैत्र माह में और दूसरी बार कार्तिक माह में।

कहां मनाया जाता है चैती छठ

सूर्योपासना का महापर्व 'चैती छठ' चैत्र मास के नवरात्र में षष्‍ठी तिथि को हर साल मनाया जाता है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में पूरी आस्था के साथ मनाया जाता है। चैती छठ का व्रत संतान सुख और संतान के दीर्घायु और घर-परिवार में सुख-समृद्धि व खुशहाली के लिए रखा जाता है। कार्तिक मास की छठ पूजा दीपावली के तुरंत बाद और चैती छठ पूजा चैत्र माह में नवरात्र के दौरान मनाई जाती है। ऐसे में आइए जानते हैं चैती छठ पूजा का महत्व-

चैती छठ पूजा तिथियां और महत्व

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, 2026 में चैती छठ पूजा की शुरुआत 22 मार्च से नहाय-खाय के साथ होगी और 25 मार्च को उषा अर्घ्य एवं पारण के साथ यह चार दिवसीय व्रत संपन्न होगा। यह पर्व विशेष रूप से सूर्य उपासना, परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए किया जाता है। मुख्य प्रसाद के रूप में ठेकुआ बनाया जाता है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

चैती छठ 2026 की प्रमुख तिथियां

नहाय-खाय:  पहला दिन  – 22 मार्च 2026

व्रती पवित्र नदी या घर में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन कद्दू-भात (कद्दू की सब्जी और चावल) का सात्विक भोजन किया जाता है।

खरना : दूसरा दिन  – 23 मार्च 2026

पूरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है, फिर व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसके बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू होता है।

संध्या अर्घ्य: तीसरा दिन – 24 मार्च 2026

शाम के समय डूबते हुए सूर्य देव को नदी या तालाब के किनारे अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह दृश्य अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से भरा होता है।

उषा अर्घ्य यानी पारण चौथा दिन – 25 मार्च 2026

सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर पारण किया जाता है।

चैती छठ का महत्व

  • यह पर्व शुद्धता, संयम और श्रद्धा का प्रतीक है।
  • मान्यता है कि यह व्रत करने से संतान सुख और पारिवारिक समृद्धि प्राप्त होती है।
  • चैत्र मास में होने के कारण इसे विशेष आध्यात्मिक फलदायी माना जाता है।
  • सूर्य देव और छठी मैया की कृपा से जीवन में सुख-शांति आती है।
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