सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया, यहां जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Shivratri: सावन शिवरात्रि भगवान शिव की भक्ति और उपासना का सबसे खास दिन माना जाता है। इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने वाला है। चलिए जानते हैं कि किस समय शिवलिंग का अभिषेक कर सकते है।
सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया, यहां जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया (सौ.सोशल मीडिया)
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Sawan Shivratri Puja Muhurat: 23 जुलाई को सावन महीने की शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। भगवान शिव के भक्तों के लिए शिवरात्रि का पर्व बहुत ही पुण्यदायक और सिद्धिदायक त्योहार है। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन व्रत रखने और और भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

जहां हर महीने शिवरात्रि आती है, वहीं सावन माह की शिवरात्रि को विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। यह दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बेहद शुभ एवं सिद्धिदायक माना जाता है और इस दिन किए गए व्रत, पूजा और अभिषेक से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।

ज्योतिषयों के अनुसार, इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया रहने वाला है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि आप किस समय शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं।

सावन शिवरात्रि पर भद्रा

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं है और राहुकाल दोपहर के 12 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 2 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। सावन मास की शिवरात्रि शिवभक्तों के लिए बेहद खास है। ज्योतिषयों की मानें तो, सावन चतुर्दशी मुहूर्त 23 की सुबह 4 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 24 की सुबह 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया भी रहने वाला है लेकिन शिव पूजन में इसका कोई मान्य नहीं। सावन शिवरात्रि पर भद्रा 05:39 सुबह से 03:31 दोपहर है।

अन्य शुभ मुहूर्त -

निशिता काल पूजा समय - रात 12 बजकर 7 मिनट से रात 12 बजकर 48 मिनट तक

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय - शाम 7 बजकर 17 मिनट से रात 9 बजकर 53 मिनट तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय - रात 9 बजकर 53 मिनट से रात 12 बजकर 28 मिनट तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय - 12 बजकर 28 मिनट से 24 जुलाई प्रातः 3 बजकर 3 मिनट तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय - 3 बजकर 3 मिनट से 24 जुलाई प्रातः 5 बजकर 38 मिनट तक

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शिव जी की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवितृ होकर साफ-सुथरे कपड़े पहने।
  • मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें।
  • एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और पार्वती माता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
  • गंगाजल और शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • भगवान शिव को खीर, फल, हलवे आदि का भोग लगाएं।
  • माता पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करें।
  • शिव जी व माता पार्वती के मंत्रों का जप करें।
  • दीपक जलाकर आरती करें।
  • अंत में सभी लोगों में पूजा का प्रसाद बांटें।
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