आज है मासिक शिवरात्रि, महादेव शिव जी की करें विधिवत पूजा, चढ़ाएं ये भोग

आज मासिक शिवरात्रि का व्रत हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मौके पर शिव-पार्वती की पूजा करने से मनचाहा फल मिलता है। इसके साथ ही वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर होती हैं।
आज है मासिक शिवरात्रि, महादेव शिव जी की करें विधिवत पूजा, चढ़ाएं ये भोग
आज है मासिक शिवरात्रि का व्रत (सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

आज जून महीने की मासिक शिवरात्रि मनाई जा रही है। यह दिन शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है,  क्योंकि इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से देवों के देव भगवान शिव कृपा मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है, तो आइए जानते है इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों के बारे में-

आज है मासिक शिवरात्रि का व्रत

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जून की रात 10 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन अगले दिन हो जाएगा। ऐसे में इस साल जून में मासिक शिवरात्रि का व्रत 23 जून, सोमवार के दिन रखा जाएगा।

ऐसे करें मासिक शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ की पूजा

  • सुबह उठकर स्नान करें और साफ धारण करें।
  • पूजा शुरू करने से पूर्व भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • एक वेदी पर भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन और पुष्प आदि चीजें चढ़ाएं।
  • चंदन और रोली से शिवलिंग पर तिलक लगाएं।
  • धूप और दीप जलाएं।
  • सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
  • भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
  • शिवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें या सुनें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती करें।

मासिक शिवरात्रि पूजा मंत्र

ॐ नमः शिवाय।।

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

बुधवार को दर्श अमावस्या, पितरों का करें तर्पण, विधिवत पिंडदान से मिलेगा पुण्य का प्रताप, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजाविधि

भगवान शिव के प्रिय भोग

भगवान शिव को सात्विक भोग प्रिय है। आप उन्हें दूध से बनी मिठाई, फल, हलवा, या खीर का भोग लगा सकते हैं। उन्हें ठंडाई और बेल का फल भी बहुत पसंद है। ध्यान रहे कि भोग में प्याज और लहसुन का प्रयोग गलती से भी न हो।

जानिए मासिक शिवरात्रि का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है और विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखी रहता है। इस व्रत के प्रभाव से साधक मोह-माया के बंधन से मुक्त होता है और उसे शिव कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com