निर्जला एकादशी पर भद्रा का साया, क्या होगा इसका असर, भूल से भी न करें ये गलतियां
निर्जला एकादशी को साल की सबसे बड़ी और सबसे कठिन एकादशी माना जाता है। वहीं, इस पावन पर्व के दिन अशुभ भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। आइए जानते हैं, भद्रा कब से कब तक है और इस दिन किन कार्यों को नहीं करना चाहिए?
- Written By: सीमा कुमारी
निर्जला एकादशी (सौ.सोशल मीडिया)
आज 6 जून 2025 को निर्जला एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी को साल की सबसे बड़ी और सबसे कठिन एकादशी मानी जाती है। इस दिन संयम, श्रद्धा और सेवा से किए गए व्रत का बड़ा महत्व है, जिससे जीवन में शुभता और समृद्धि आती है।
वहीं, इस पावन पर्व के दिन अशुभ भद्रा का साया भी मंडरा रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं, भद्रा कब से कब तक है और इस दौरान किन कामों को करने से बचना चाहिए?
क्या है निर्जला एकादशी व्रत तिथि और पारण का शुभ समय
ज्योतिषयों के अनुसार, इस वर्ष निर्जला एकादशी तिथि का प्रारंभ 6 जून 2025 को प्रातः 2:15 बजे होगा और इसका समापन 7 जून 2025 को प्रातः 4:47 बजे होगा। पारण यानी व्रत तोड़ने का समय 7 जून को दोपहर में 1:44 बजे से 4:31 बजे तक है। वहीं, हरि वासर की समाप्ति 7 जून को सुबह 11:25 बजे होगी।
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इस बार निर्जला एकादशी पर भद्रा का अशुभ साया
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, इस निर्जला एकादशी पर भद्रा का अशुभ प्रभाव पड़ रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन यानी 6 जून को भद्रा काल दोपहर 3:31 PM बजे से लेकर 7 जून सुबह 4:47 PM बजे तक तक है।
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आपको बात दें कि भद्रा काल को हिंदू धर्म में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। इस समय में पूजा-पाठ, दान या कोई नया काम आरंभ करने से बचना चाहिए।
इस दिन भूलकर भी न करें ये काम
न करें जल सेवन
निर्जला एकादशी का व्रत पूरी तरह निर्जल होता है। व्रती जल भी ग्रहण नहीं करते। इस कठिन व्रत का पालन नियमपूर्वक करना चाहिए।
झूठ बोलने से बचें
इस दिन व्रती समेत सभी लोगों को झूठ बोलना, छल-कपट करना और दूसरों को धोखा देना पाप माना जाता है। इससे व्रत का पुण्य नष्ट हो सकता है।
क्रोध और कलह से बचें
एकादशी तिथि आत्म-शुद्धि और शांति का दिन होता है। इस दिन घर में शांति बनाए रखें। क्रोध, विवाद या अपशब्दों का उपयोग व्रत के पुण्य को कम कर सकता है।
तामसिक या कांटे वाले भोजन न करें
जैसे कटहल, करेला, कंटोला खाने से बचें, यहां तक कि जो लोग व्रत नहीं कर रहे हों तो भी उन्हें सात्विक आहार लेना चाहिए।
