Bakrid 2026: बकरीद की तारीख़ का कंफ्यूज़न ख़त्म, यहां जानिए कब मनेगी, और जानिए क्यों दी जाती है कुर्बानी
Bakrid 2026 Date: ईद-उल-अजहा यानी बकरीद को लेकर लोगों में तारीख़ को लेकर कंफ्यूज़न बना हुआ है। इस लेख में जानिए बकरीद कब मनाई जाएगी, कुर्बानी की परंपरा क्यों निभाई जाती है और क्या है इसका महत्व।
- Written By: सीमा कुमारी
ईद-उल-अजहा यानी बकरीद (सौ.AI)
Bakrid Celebration In India: इस साल बकरीद का त्योहार 28 मई 2026 को मनाई जा रही है। बकरीद इस्लाम धर्म के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है। जिसे ईद-उल-फित्र के नाम से भी जाना जाता है। इस्लामिक धर्मगुरु के अनुसार, यह त्योहार हर साल हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और कुर्बानी त्याग की याद में मनाया जाता है।
दुनिया भर के मुसलमान इसे बड़ी धूमधाम से मनाते है। इस दिन मस्जिद में विशेष नमाज अदा की जाती है और अल्लाह की इबादत के लिए कुर्बानी दी जाती है। हर साल की तरह इस बार भी ईद की तारीख को लेकर लोगों में कंफ्यूजन बना हुआ है।
कब मनाई जाएगी बकरीद 2026?
इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, ईद-उल-अजहा जुल हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। भारत में 18 मई को जुल हिज्जा का चांद दिखाई दिया था, जिसके बाद 19 मई से नए महीने की शुरुआत मानी गई।
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ऐसे में बताया जा रहा है कि, जुल हिज्जा की 10वीं तारीख 28 मई, गुरुवार को पड़ रही है। इसी दिन पूरे भारत में बकरीद का त्योहार मनाया जाएगा।
आखिर बकरीद पर क्यों दी जाती है कुर्बानी?
इस्लामिक धर्म गुरु के अनुसार, बकरीद इस्लाम धर्म के दो प्रमुख त्योहारों में से एक हैं। इसे कुर्बानी का पर्व भी कहा जाता है। इस दिन कुर्बानी देने की परंपरा हजरत इब्राहिम से जुड़ी हुई है। इस्लामी मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के त्याग और समर्पण की परीक्षा लेने के लिए उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी।
बताया जाता है कि, हजरत इब्राहिम अपने बेटे को बहुत अधिक प्यार करते थे। इसलिए अल्लाह के आदेश को मानते हुए अपने बेटे को कुर्बान करने जा रहे थे। अल्लाह उनकी साफ नीयत को देखकर प्रसन्न हुए। जब हजरत इब्राहिम कुर्बानी देने जा रहे थे तभी अल्लाह ने आखिरी समय में उनके बेटे की जगह तुंबे को कुर्बानी के लिए भेज दिया। तभी से इस घटना की याद में कुर्बानी की परंपरा चली आ रही है।
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इस्लाम धर्म में कुर्बानी का क्या है महत्व?
इस्लाम धर्म में कुर्बानी का बड़ा महत्व है। यह पर्व अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और कुर्बानी त्याग का प्रतीक बताया गया है। बकरीद के दिन सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में लोगों का हुजूम देखने को मिलता है।
इस दिन लोग सुबह की पवित्र नमाज के बाद कुर्बानी की रस्म निभाते हैं। इस्लाम में इसे कुर्बानी त्याग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग अपने सामर्थ्य के हिसाब से जानवरों की कुर्बानी देते हैं। इस्लाम में कुर्बानी के मांस को तीन हिस्सों में बांटने की परंपरा है। इसमें पहले हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और तीसरा हिस्सा जरूरतमंद लोगों के लिए रखा जाता है।
