Bagalamukhi Jayanti 2026: आज है मां बगलामुखी जयंती, यहां जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त

Bagalamukhi Jayanti Worship Rules: बगलामुखी जयंती 2026 आज श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। इस पावन दिन मां बगलामुखी की विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व होता है।
 Maa Baglamukhi Ki Puja Ke Labh
मां बगलामुखी (Source. Pinterest)
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 Maa Baglamukhi Ki Puja Ke Labh: आज बगलामुखी जयंती मनाई जा रही हैं। हिंदू धर्म में इस जयंती का बड़ा महत्व बताया गया हैं। हिंदू धर्म में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है और दस महाविद्याओं में से एक मां बगलामुखी को देवी माना गया हैं। हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को बगलामुखी का जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

कहते हैं सच्चे मन से जो भी आज के दिन मां बगलामुखी की पूजा करता है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। आपको बता दें कि देवी बगलामुखी को दस महाविद्याओं में से एक माना जाता है, इन्हें 'स्तंभन शक्ति' की देवी भी कहते हैं।

बगलामुखी जयंती का धर्मिक महत्व

सनातन धर्म में बगलामुखी जयंती का धर्मिक महत्व हैं। मान्यता है कि इस दिन देवी की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, वाणी पर नियंत्रण और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी बगलामुखी का प्राकट्य एक भयंकर तूफान को शांत करने के लिए हुआ था। मां बगलामुखी (Bagalamukhi Jayanti) अपनी दिव्य शक्ति से विनाशकारी शक्तियों को रोककर संसार की रक्षा की। इसलिए इस दिन की पूजा विशेष रूप से संकट निवारण, कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता और विरोधियों को शांत करने के लिए की जाती है।

बगलामुखी जयंती का शुभ मुहूर्त

चौघड़ियां शुभ मुहूर्त आज सुबह 7 बजकर 24 मिनट से लेकर 9 बजकर 2 मिनट तक रहेगा। अमृत काल का शुभ मुहूर्त आज सुबह 9 बजकर 3 मिनट से लेकर 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। वहीं शुभ चौघड़ियां मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से लेकर 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। प्रदोष काल शाम को 6 बजकर 6 मिनट से लेकर 7 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

ऐसे करें बगलामुखी माता की पूजा

  • बगलामुखी जन्मोत्सव के दिन प्रातः स्नान कर पीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
  • पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है इसलिए पीले फूल, हल्दी, चने की दाल और पीले प्रसाद का उपयोग किया जाता है।
  • पूजा के लिए देवी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और सामने दीपक जलाएं।
  • इसके बाद हल्दी से तिलक करें और पीले पुष्प अर्पित करें।
  • श्रद्धा से देवी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें और प्रसाद बांटें।
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