Ashwatthama (Source. Pinterest)
Ashwatthama Is Alive Or Not: बचपन से हम सबने एक कहानी जरूर सुनी है महाभारत के योद्धा अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं। कहा जाता है कि वे अमर नहीं थे, बल्कि भगवान कृष्ण के श्राप के कारण आज तक भटक रहे हैं। यह कथा केवल आस्था नहीं, बल्कि रहस्य और जिज्ञासा से भरी हुई है, जिसने पीढ़ियों से लोगों को सोचने पर मजबूर किया है।
महाभारत के अनुसार, अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे। युद्ध के दौरान उनके पिता को यह झूठी खबर दी गई कि उनका पुत्र मारा गया है। इसी सदमे में द्रोणाचार्य की मृत्यु हुई। पिता की मृत्यु से क्रोधित अश्वत्थामा ने दुर्योधन से वचन लिया कि वे पांडवों का अंत करेंगे। युद्ध समाप्त होने के बाद उन्होंने रात में पांडव शिविर पर हमला किया, लेकिन भूलवश पांडवों के पांचों पुत्रों की हत्या कर दी। इस कृत्य से क्रोधित पांडवों ने उनका पीछा किया और अर्जुन से उनका भयंकर युद्ध हुआ।
युद्ध में अश्वत्थामा ने ‘ब्रह्मास्त्’’ चलाया, जबकि अर्जुन ने ‘पाशुपतास्त्’’ का प्रयोग किया। महर्षियों के कहने पर अर्जुन ने अपना अस्त्र वापस ले लिया, लेकिन अश्वत्थामा ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने क्रोध में आकर अस्त्र को उत्तरा के गर्भ की ओर मोड़ दिया, जिसमें अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित पल रहा था।
कथा के अनुसार, ब्रह्मास्त्र ने गर्भस्थ शिशु को जला दिया, लेकिन भगवान कृष्ण ने उसे पुनर्जीवित कर दिया और अश्वत्थामा को श्राप दिया कि वे 3,000 वर्षों तक कोढ़ से पीड़ित होकर धरती पर भटकते रहेंगे, बिना प्रेम और सम्मान के।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, अश्वत्थामा को कलियुग के अंत तक जीवित रहने का श्राप मिला है। कुछ कथाओं में यह भी कहा जाता है कि वे अरब प्रायद्वीप या हिमालय की तराई में चले गए।
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मध्य प्रदेश के एक डॉक्टर की कहानी अक्सर सुनाई जाती है। बताया जाता है कि एक मरीज के माथे पर गहरा और कभी न भरने वाला घाव था। कई दवाइयों के बावजूद घाव ताजा और रक्तस्राव से भरा रहा। डॉक्टर ने मजाक में कहा, “कहीं आप अश्वत्थामा तो नहीं?” और जैसे ही वह मुड़ा, मरीज गायब हो चुका था।
कुछ योगियों, जैसे पायलट बाबा, ने भी दावा किया है कि उन्होंने हिमालय की तलहटी में अश्वत्थामा को देखा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक लंबा व्यक्ति जिसके माथे पर गहरा निशान है, हर साल एक बार वहां दिखाई देता है और शिवलिंग पर फूल चढ़ाता है।
इन सभी कथाओं और दावों के बावजूद, अश्वत्थामा के अस्तित्व का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। कहा जाता है कि उन्हें अदृश्य रहने की शक्ति प्राप्त है, इसलिए उनके दर्शन दुर्लभ हैं। आस्था, इतिहास और रहस्य का यह संगम आज भी लोगों के मन में सवाल खड़ा करता है क्या सच में अश्वत्थामा आज भी इस धरती पर भटक रहे हैं?