आमलकी एकादशी की पूजा के लिए अगर आंवले का पेड़ नहीं है पास, तो ऐसे करें पूजा, फलित होगी
February Ekadashi Kab Hai 2026: आमलकी एकादशी पर आंवले के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। यदि पास में पेड़ उपलब्ध न हो, तो भी कुछ सरल विधियों से पूजा कर पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
- Written By: सीमा कुमारी
आमलकी एकादशी (सौ.सोशल मीडिया)
Amlaki Ekadashi 2026: कल, 27 फरवरी 2026 को आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह व्रत हर साल फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाई जाती है। धर्मग्रंथों के अनुसार, इस दिन आंवला वृक्ष में स्वयं भगवान विष्णु का वास माना जाता है। लेकिन शहरों में रहने वाले कई लोगों के मन में प्रश्न रहता है कि अगर घर या आसपास आंवला का पेड़ नहीं है तो क्या व्रत अधूरा रह जाएगा? ऐसे में आइए जानते है इस बारे में-
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आमलकी एकादशी का क्या शुभ मुहर्त
पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि का व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। उदय तिथि के अनुसार इसी दिन व्रत रखना उचित माना जाता है। इस व्रत का पारण 28 फरवरी को सुबह 6:47 बजे के बाद किया जाएगा।
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अगर घर पर पेड़ नहीं है तो कैसे करें पूजा
आमलकी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने की परंपरा है। लेकिन यदि आपके घर या आसपास आंवले का पेड़ उपलब्ध नहीं है, तो भी आप पूरी श्रद्धा से पूजा कर पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं।
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आंवले की तस्वीर या फल रखें
यदि पेड़ न हो तो पूजा स्थान पर आंवले का फल या उसकी तस्वीर स्थापित करें।
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भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा
विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं, पीले फूल अर्पित करें और विष्णु सहस्रनाम या मंत्रों का जाप करें।
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आंवले का भोग लगाएं
संभव हो तो आंवले से बनी मिठाई या कच्चा आंवला भगवान को अर्पित करें।
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व्रत और दान
इस दिन व्रत रखें और जरूरतमंदों को फल, वस्त्र या अन्न का दान करें। मान्यता है कि इससे कई गुना पुण्य प्राप्त होता है।
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तुलसी पूजन करें
तुलसी को भी जल अर्पित करें, क्योंकि तुलसी और विष्णु पूजन का गहरा संबंध है।
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ध्यान रखने योग्य बातें
पूजा पूरी श्रद्धा और सच्चे मन से करें।
ब्रह्म मुहूर्त या प्रातःकाल पूजा करना शुभ माना जाता है।
सात्विक भोजन ग्रहण करें और क्रोध से दूर रहें।
श्रद्धा, विश्वास और नियम से की गई पूजा ही सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि सच्चे मन से उपासना की जाए तो आंवले का पेड़ न होने पर भी आमलकी एकादशी का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है।
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दीपक और जल अर्पण
एक घी का दीपक जलाएं और शुद्ध जल अर्पित करें। मान्यता है कि इससे पापों का क्षय होता है और सौभाग्य बढ़ता है।
आंवले के पेड़ की पूजा ना भी कर पाएं तो इस दिन आंवले की पूजा जरूर करें।
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क्या मिलता है इस व्रत का फल?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से पापों का नाश, स्वास्थ्य लाभ और विष्णु कृपा प्राप्त होती है। आंवला आयुर्वेद में भी अमृत समान माना गया है ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है इसलिए इस दिन आंवला का सेवन करना भी शुभ माना जाता है।
