Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया 2026 को सोना खरीदने का सबसे शुभ मुहूर्त क्या है? नोट कीजिए

Akshaya Tritiya Gold Buying Muhurat:अक्षय तृतीया 2026 पर सोना खरीदना बेहद शुभ माना गया है, क्योंकि यह दिन स्वयं सिद्ध मुहूर्त होता है। 18 अप्रैल को सुबह से दोपहर तक का समय खरीदारी के लिए शुभ है।
Akshaya Tritiya Par Sona Lene Ka Time
अक्षय तृतीया( सौ.सोशल मीडिया)
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Akshaya Tritiya Par Sona Lene Ka Time: हर साल वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया का पावन पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19अप्रैल यानी रविवार को मनाई जा रही है।

धर्म शास्त्रों में अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने की परंपरा के बारे बताया गया है। कहा जाता है कि, इस दिन सोना खरीदने से अक्षय फलों की प्राप्ति होती है। इसलिए लोग इस दिन सोना खरीदना नही भूलते है। चलिए आपको बताते हैं अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है?

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त क्या है?

अक्षय तृतीया 2026 तिथि और समय

  • तृतीया तिथि शुरू- 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे
  • तृतीया तिथि समाप्त- 20 अप्रैल 2026, सुबह 7:27 बजे
  • अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त- 10:49 बजे से 12:20 बजे तक

अक्षय तृतीया 2026 सोना खरीदने का शुभ समय

पूरे दिन सोना खरीदने का समय- 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, सुबह 5:51 बजे तक.

अलग‑अलग शुभ मुहूर्त

  • सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- 10:49 से 12:20
  • दोपहर का मुहूर्त (शुभ)- 1:58 से 3:35
  • शाम का मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 6:49 से 10:57
  • रात का मुहूर्त (लाभ)- 20 अप्रैल, 1:43 से 3:05
  • सुबह जल्दी का मुहूर्त (शुभ)- 20 अप्रैल, 4:28 से 5:51

आखिर अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना क्यों है? शुभ

अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सोना लेने से घर में धन, सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है तथा देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। शुभ मुहूर्त में की गई खरीदारी को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ सोना एक सुरक्षित निवेश भी है, जो भविष्य में आर्थिक मजबूती और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है।

ऐसे करें अक्षय तृतीया पूजा-विधि

अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र, गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यदि संभव न हो तो घर में ही स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की शांत मन से पूजा करनी चाहिए।

इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा सफेद या पीले कमल अथवा गुलाब के पुष्पों से करना शुभ माना गया है। नैवेद्य में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम की कोपल, ककड़ी और भीगी हुई चने की दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।

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