

Shiv Ji Ke Mantra: भगवान शिव सच्ची श्रद्धा और भाव के भूखे हैं। अगर आप पूरे मन से उनके मंत्रों का जाप करते हैं, तो वे प्रसन्न होकर आपके जीवन के सभी कष्टों को दूर कर देते हैं। शिव पुराण और हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, 'ॐ नमः शिवाय' केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की संपूर्ण ऊर्जा का स्रोत है।
भगवान शिव को आशुतोष कहा जाता है, जिसका अर्थ है जो जल्द प्रसन्न हो जाएं। अगर आप पूरे मन से उनकी पूजा करते हैं, तो उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं।
यह मंत्र पंच तत्वों- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक है। इस मंत्र से मन को नियंत्रित किया जा सकता है। इसके पाँच अक्षर पाँच तत्वों से जुड़े हैं और इसके जाप से आपकी ऊर्जा स्थिर होती है। इसकी ध्वनि मन को स्वाभाविक रूप से शांत करती है, मन के भारीपन को कम करती है। इस मंत्र की वाइब्रेशन नर्वस सिस्टम के लिए एक 'रीसेट बटन' की तरह काम करती है।
इस मंत्र का लयबद्ध चक्र भय को नियंत्रित करता है और जब भी जीवन में कोई अस्थिरता आए, तो यह आपकी भावनात्मक ऊर्जा को नियंत्रित करता है। अधिकतर लोग बीमारी, चिंता या किसी बड़ी परेशानी के दौरान इस मंत्र का जाप करते है। भोर में या सोने से पहले इसका जाप करने से आपके चारों ओर और आपके भीतर एक ढाल तैयार होता है, जो आपको साहस देता है।
यह एक मंत्र नहीं बल्कि युद्धघोष है, जो संसार के विरोध नहीं अपितु उन शंकाओं के विरोध में है, जो आपको आगे बढ़ने से रोकती है। यह आंतरिक शक्ति का एक प्रखर अहसास जगाता है, आपको याद दिलाता है कि हर हर महादेव हर सांस में व्याप्त है। इसके जाप से आलस्य दूर भागता है और नई ऊर्जा का संचार होता है।
मृत्युंजय मंत्र से निकला यह मंत्र अधिक सौम्य और संक्षिप्त है। यह शिव को त्रिनेत्रित, माया से परे द्रष्टा के रूप में आह्वान करता है। यह मंत्र अंतर्ज्ञान को तीव्र करता है और मानसिक दुविधा को दूर करता है। इस मंत्र का जाप धीरे-धीरे करें, मंत्र के एक-एक अक्षर को बूंदों की तरह स्थिर और प्रकाशमान होने दें।
यह मंत्र शिव के 'रुद्र' रूप का परिचायक है। इसकी ऊर्जा ठहराव, पुरानी भावनात्मक यादों और भारीपन को खत्म कर देती है। यह पुराने ढर्रों को तोड़ने और एक नई मानसिक स्थिति में प्रवेश करने के लिए बहुत शक्तिशाली है। इसे धीमी और गहरी सांस लेते हुए जपें।