24 मार्च, स्कंद षष्ठी, संकटों से मुक्ति और संतान प्राप्ति के लिए इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा
Skanda Shashti Auspicious Day: जो भी भक्त स्कंद षष्ठी के दिन श्रद्धा भाव से भगवान कार्तिकेय की पूजा करता है उसके जीवन से सभी प्रकार की समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
- Written By: सीमा कुमारी
भगवान कार्तिकेय (सौ. Gemini)
Skanda Shashti Vrat Shubh Muhurat:शिव-गौरी पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का पावन पर्व हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाई जाती है। इस बार चैत्र महीने की स्कंद षष्ठी का पर्व मंगलवार 24 मार्च को रखा जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन श्रद्धा भाव के साथ भगवान कार्तिकेय की पूजा करता है उसके जीवन से सभी प्रकार की समस्याएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
कब है चैत्र महीने का स्कंद षष्ठी का व्रत?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष, चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत आज 23 मार्च को शाम 6 बजकर 38 मिनट पर हो रही है। वहीं, इसका समापन 24 मार्च को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए स्कंद षष्ठी का व्रत 24 मार्च को रखा जाएगा। इस दिन आप भगवान कार्तिकेय की पूजा कर व्रत रख सकते हैं।
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24 मार्च का शुभ मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 3 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से दोपहर 3 बजकर 19 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 57 मिनट तक
- अमृत काल: शाम 4 बजकर 6 मिनट से 5 बजकर 35 मिनट तक
स्कंद षष्ठी व्रत महत्व
हिन्दू धर्म में स्कंद षष्ठी का व्रत बहुत ही शुभ एवं महत्वपूर्ण बताया गया हैं। ऐसी मान्यता है कि, इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती हैं। इसके अलावा, संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत बेहद फलदायी माना जाता हैं। इससे संतान प्राप्ति का आशीर्वाद तो मिलता ही, साथ में जीवन में खुशहाली और तरक्की भी बनी रहती हैं।
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कैसे करें भगवान कार्तिकेय की पूजा
- स्कंद षष्ठी व्रत के दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करें।
- इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल की सफाई करें।
- फिर चौकी पर कार्तिकेय भगवान और शिव परिवार की तस्वीर और प्रतिमा रखें।
- भगवान को फूल, फल, धूप-दीप अर्पित कर विधि-विधान से उनकी पूजा करें।
- भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें।
- स्कंद षष्ठी व्रत की कथा अवश्य पढ़ें।
- भोग लगाकर और आरती करके पूजा संपन्न करें।
