ओडिशा के पांच टीचर्स ने किया गुरु-शिष्य का रिश्ता कलंकित, सातवीं की छात्रा के साथ की हैवानियत

Odisha School Rape Case: ओडिशा के केंद्रपाड़ा में एक निजी स्कूल की सातवीं की छात्रा के साथ लंबे समय तक यौन उत्पीड़न के आरोप में पांच स्टाफ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें चार शिक्षक शामिल हैं।
rajkanika police station
प्रतीकात्मक फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया
Published on: 
Updated on: 

Odisha School Physical Abuse Case: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक निजी इंग्लिश मीडियम स्कूल के पांच कर्मचारियों ने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए सातवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा का लंबे समय तक यौन उत्पीड़न किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार शिक्षकों और एक चपरासी को गिरफ्तार कर लिया है।

यह दिल दहला देने वाली घटना केंद्रपाड़ा जिले के राजकनिका थाना क्षेत्र की है। पुलिस के अनुसार, पीड़िता की मां ने राजकनिका थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसमें यह गंभीर आरोप लगाया गया कि स्कूल के चार शिक्षकों और एक चपरासी ने उनकी बेटी के साथ दबाव, धमकी और लालच के जरिए बार-बार गलत व्यवहार किया।

बताया गया है कि 13 वर्षीय मासूम बच्ची ने 14 जनवरी को घर पहुंचकर रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई थी, जिसके बाद परिवार ने अधिकारियों से संपर्क किया। अंततः जिला बाल कल्याण समिति के हस्तक्षेप और 48 घंटे की गहन जांच के बाद 18 फरवरी को औपचारिक शिकायत पुलिस के पास पहुंची और 21 फरवरी 2026 को केस दर्ज किया गया।

इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

शिकायत मिलते ही स्टेशन ऑफिसर संजय मलिक के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम ने स्कूल में छापेमारी की और कुछ ही घंटों के भीतर पांचों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान 37 वर्षीय चंदन कुमार प्रुस्ती, 31 वर्षीय बिस्वा रंजन साहू, 47 वर्षीय रश्मि कांता बिस्वाल, 34 वर्षीय मिनती बाई और 32 वर्षीय चपरासी रश्मि रंजन राणा के रूप में हुई है। इन गिरफ्तारियों से इलाके में हड़कंप मच गया है और निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और वहां की निगरानी व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

पॉक्सो एक्ट और 'स्विफ्ट ट्रायल' के तहत कार्रवाई

पुलिस ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और POCSO एक्ट, 2012 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन पर यौन उत्पीड़न, सामूहिक दुष्कर्म (गैंग रेप), और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप हैं। मामले की जांच ‘स्विफ्ट ट्रायल इनिशिएटिव' के तहत की जा रही है ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। साक्ष्य जुटाने के लिए एक फोरेंसिक टीम को स्कूल भेजा गया है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराने के साथ-साथ एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी द्वारा बच्चों के अनुकूल माहौल में उसका बयान दर्ज किया गया है। बच्ची को मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और सहायता भी प्रदान की जा रही है।

स्कूल के अभिभावकों में भारी उबाल

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और दोषियों को कठोरतम सजा देने की मांग करने लगे। विपक्षी दल बीजेडी (BJD) ने भी इस मुद्दे पर केंद्रपाड़ा एसपी को एक ज्ञापन सौंपा है और मामले की उच्च स्तरीय निगरानी की मांग की है।

बाल कल्याण समिति ने जिला शिक्षा अधिकारी को भी निर्देश दिया है कि वे इस निजी स्कूल के खिलाफ अलग से जांच करें। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि अगर स्कूल जैसे सुरक्षित स्थानों पर भी बच्चे दरिंदगी का शिकार होंगे, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। वर्तमान में मामले की निगरानी खुद डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस और एसपी केंद्रपाड़ा कर रहे हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com