

CM Bhajanlal Sharma Water Security: राजस्थान में दशकों से अटके हुए प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश भर में कई पुराने मुद्दों, खासकर राज्यों के बीच पानी के विवादों को सुलझाया जा रहा है।
चाहे राजस्थान और मध्य प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड, या हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बीच का मामला हो, लगातार नई योजनाएं बनाई और लागू की जा रही हैं।
साथ ही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्षों से अनसुलझे विवादों को भी सुलझाया जा रहा है। राजस्थान लंबे समय से यमुना के पानी में अपना हिस्सा मांग रहा था और 1994 में लिए गए मूल फैसले को अब सभी संबंधित अधिकारियों के बीच बातचीत के जरिए आगे बढ़ाया।
23 जून, 2026 को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में पानी के विभिन्न मुद्दों पर बैठक की। इस बैठक में दोनों मुख्यमंत्रियों ने 1994 में हुए समझौते के तहत हरियाणा के अतिरिक्त पानी के मुद्दे पर चर्चा की।
दोनों राज्यों में इस बात पर सहमति बनी कि एक नया समझौता किया जाएगा ताकि यह पक्का किया जा सके कि राजस्थान को उतना पानी मिले जितना उसे मूल रूप से समझौते के तहत आवंटित किया गया था।
इस समझौते के अनुसार, पानी को पाइपलाइन के जरिए राजस्थान तक पहुंचाया जाएगा और दोनों राज्य इस व्यवस्था पर सहमत हो गए हैं। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल नहीं, बल्कि राजस्थान के भविष्य में एक ऐतिहासिक निवेश है।
आने वाले सालों में, यमुना का पानी विकास, समृद्धि और खुशहाली का एक नया दौर लाएगा, जिससे लाखों लोगों की जिंदगी बदल जाएगी और एक विकसित, आत्मनिर्भर और जल-सुरक्षित राजस्थान की मजबूत नींव पड़ेगी।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का मानना है कि, जल सुरक्षा, प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विजन का एक अहम स्तंभ है। इसी विजन से प्रेरित होकर, राजस्थान सरकार हर नागरिक के लिए पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए पूरी लगन से काम कर रही है। पानी न केवल जीवन का आधार है, बल्कि कृषि, उद्योग, निवेश, रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और समग्र सामाजिक विकास के लिए भी सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है।
राजस्थान सरकार 34,102 करोड़ रुपए की यह पहल राज्य की पानी से जुड़ी चुनौतियों का स्थायी समाधान करेगी, खासकर शेखावाटी जैसे पानी की कमी वाले इलाकों में। यह प्रोजेक्ट लाखों परिवारों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करेगा, भूजल पर निर्भरता कम करेगा, जल संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करेगा और क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देगा।
यह निवेश, रोजगार, कृषि, पर्यटन और बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देकर एक विकसित राजस्थान बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। पानी की बेहतर उपलब्धता से औद्योगिक विकास के लिए अनुकूल माहौल बनेगा, नया निवेश आएगा, कृषि और पशुपालन को नई गति मिलेगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा। यह प्रोजेक्ट राजस्थान की दीर्घकालिक जल प्रबंधन रणनीति को भी मजबूत करेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।