पंजाब के सीएम भगवंत मान। इमेज-सोशल मीडिया
Punjab Dalit Politics : पंजाब की राजनीति में फिर सोशल इंजीनियरिंग की आहट सुनाई दे रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) अब अपने उस पुराने वादे को हकीकत में बदलने की तैयारी कर रही है, जो उसने साल 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान पंजाब की जनता से किया था। सूत्रों की मानें तो 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी पंजाब में एक ‘दलित डिप्टी सीएम’ नियुक्त करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
पंजाब की सियासत का सबसे बड़ा सच यहाँ की 32 प्रतिशत दलित आबादी है। देश में सबसे ज्यादा दलित जनसंख्या प्रतिशत वाले इस राज्य में यह समुदाय सत्ता की चाबी माना जाता है। 2017 में अरविंद केजरीवाल ने इसी वोट बैंक को साधने के लिए दलित डिप्टी सीएम का दांव खेला था, लेकिन तब सफलता हाथ नहीं लगी। 2022 में भारी बहुमत मिलने के बाद भी अब तक किसी को इस पद पर नहीं बैठाया गया, लेकिन अब चुनावी साल करीब आते ही पार्टी को अपना पुराना वादा याद आ गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस पद के लिए पार्टी के भीतर गहन मंथन चल रहा है। डिप्टी सीएम की रेस में फिलहाल दो प्रमुख नाम चर्चा में हैं। इनमें राज्य के वर्तमान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा हैं। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की तर्ज पर पंजाब में भी दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं, जिसमें एक चेहरा दलित समुदाय से और दूसरा हिंदू समुदाय से हो सकता है।
दलित समुदाय पारंपरिक रूप से कांग्रेस और अकाली दल का वफादार रहा है। लेखक देसराज काली के अनुसार दलित आबादी बड़ी होने के बावजूद अलग-अलग गुटों में बंटी रही है। AAP इसी बिखराव को समेटकर एक मजबूत आधार बनाना चाहती है। महिलाओं को 1000 रुपए देने की घोषणा के बाद अब दलित कार्ड खेलना केजरीवाल की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
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कहा जा रहा कि अरविंद केजरीवाल इस मुद्दे पर कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। जल्द पंजाब कैबिनेट का विस्तार हो सकता है। उसमें नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपकर पार्टी अपनी पकड़ मजबूत करेगी। 2022 में जो कमी रह गई थी, उसे 2027 से पहले पूरा कर AAP पंजाब में अपनी सत्ता बरकरार रखने का रास्ता साफ करना चाहती है।