सुखबीर सिंह बादल (सोर्सः सोशल मीडिया)
चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को तख्त ने धार्मिक सजा दी है। इसके बाद आज वे व्हीलचेयर पर गले में तख्ती लटकाए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुंचे। इस सजा के तहत बादल को स्वर्ण मंदिर में ‘सेवादार’ के तौर पर काम करना होगा और दरवाजे पर ड्यूटी करनी होगी तथा लंगर परोसना होगा।
अकाल तख्त ने सुखबीर सिंह बादल को ये सजा शिरोमणि अकाली दल और पंजाब में उनकी सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई ‘गलतियों’ का हवाला देते हुए दी है। हालांकि सुखबीर सिंह बादल के पैर में चोट लगी है और इस वजह से वे 3 दिसंबर से 2 दिन के लिए श्री दरबार साहिब (स्वर्ण मंदिर) के घंटाघर के बाहर ड्यूटी करेंगे।
#WATCH | पंजाब: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल अकाल तख्त साहिब द्वारा कल उन्हें सुनाई गई धार्मिक सजा के बाद गले में पट्टिका लटकाए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पहुंचे। सजा में स्वर्ण मंदिर में ‘सेवादार’ के रूप में काम करने और बर्तन तथा जूते साफ करने का निर्देश शामिल है।… pic.twitter.com/BXLEagNFnm — ANI_HindiNews (@AHindinews) December 3, 2024
सुखबीर बादल की सजा शुरू हो गई है इस समय सुखबीर बादल के गले में जो तख्ती दिखाई दे रही है वह इस सजा के दौरान अकाल तख्त द्वारा पहनी गई माफी की तख्ती है। उनके हाथ में एक भाला भी दिखाई दे रहा है। उनकी सजा शुरू हो गई है और वे यह सजा काट रहे हैं। अगले दो दिन वह यहीं सजा काटेंगे।
सुखदेव सिंह ढींडसा भी अपनी सजा काटने पहुंचे। वह भी गले में पट्टिका और हाथ में भाला पहने नजर आए। अपनी सजा काटने के बारे में उन्होंने कहा, सेवा का आदेश मेरे लिए आदेश है। यह भगवान का आदेश है। अपनी सजा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, हम पहले गेट पर रुकेंगे और फिर लंगर चलाएंगे।
पहले वह दो दिन श्री दरबार साहिब में सेवादार की ड्यूटी करेंगे। इसके बाद वह 2 दिन श्री केशगढ़ साहिब, फिर 2 दिन श्री दमदमा साहिब तलवंडी साबो, 2 दिन श्री मुक्तसर साहिब और 2 दिन श्री फतेहगढ़ साहिब में गले में पट्टिका और हाथ में भाला पहनकर अपनी सजा काटेंगे।
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सिर्फ सुखबीर सिंह बादल ही नहीं बल्कि 2007 से 2017 तक अकाली दल के मंत्रिमंडल में मंत्री के तौर पर काम करने वाले अन्य सिख नेताओं के लिए भी धार्मिक सजा का ऐलान किया गया है। हालांकि, सुखबीर सिंह बादल और सुखदेव सिंह ढींडसा को भी बाकी अकाली दल के नेताओं की तरह गुरुद्वारों के शौचालय साफ करने और लंगर हॉल के बर्तन साफ करने की सजा दी गई थी, लेकिन सुखबीर बादल के पैर में चोट लगने और सुखदेव सिंह ढींडसा की खराब सेहत के चलते दोनों को सजा में छूट दी गई और व्हील चेयर पर बैठकर सेवादार की ड्यूटी करने का आदेश दिया गया।
सुखबीर सिंह बादल को उनके कई अपराधों के चलते श्री अकाल तख्त साहिब ने यह सजा दी है। उन पर सबसे बड़ा आरोप यह था कि उन्होंने साल 2007 में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के खिलाफ सलाबतपुरा में दर्ज केस वापस ले लिया था और इसे राम रहीम को माफ करने का एक तरीका माना गया था। दूसरा आरोप यह था कि उन्होंने वोट बैंक के लिए अपने संप्रदाय यानी धर्म से गद्दारी की। तीसरा आरोप यह था कि उनकी सरकार के दौरान बरगारी बेअदबी मामले की ठीक से जांच नहीं की गई।