राम मंदिर दान विवाद: केंद्रीय मंत्री ने दी चेतावनी, तो प्रियंक खड़गे ने की निष्पक्ष जांच की मांग

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या राम मंदिर दान में कथित गबन पर सियासी घमासान। एसआईटी जांच में 8 आरोपी, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा। प्रियंक खड़गे ने की निष्पक्ष जांच की मांग। जानें पूरी खबर।
Ram Temple donation controversy: Union minister issues warning, Priyank Kharge demands impartial probe
प्रियंक खड़गे (सोर्स-सोशल मीडिया)
Updated on

Ram Mandir Donation Controversy: अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गबन के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। मामले में एसआईटी जांच जारी है और आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बाद सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय जल शक्ति एवं रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा कि भगवान राम के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले लोगों को स्वयं भगवान राम दंड देंगे।

वहीं, कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है। खड़गे का कहना है कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया था, इसलिए उसके उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोगों का विश्वास बना रहेगा। इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने विवाद को और गहरा कर दिया है।

भगवान के नाम पर धोखा करना महापाप

दावणगेरे में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा, "जिस किसी ने भी गलत किया है, उसने गलत किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। भगवान के नाम पर इस तरह का कृत्य करना पाप है। भगवान राम उनके नाम पर धोखाधड़ी करने वालों को दंड देंगे।"

दान के उपयोग में पारदर्शिता की उठाई मांग

वहीं, कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धालुओं से एकत्र किए गए दान के उपयोग को लेकर पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले की व्यापक जांच कर सच्चाई देश के सामने लाई जानी चाहिए। खड़गे ने कहा, "जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। सार्वजनिक योगदान के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।"

PM मोदी और CM योगी से स्पष्टीकरण की मांग

उन्होंने कहा कि इन आरोपों पर पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से प्रतिक्रिया देना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश सरकार से मामले पर स्पष्टीकरण जारी करने तथा निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा कि इससे लोगों का विश्वास बना रहेगा। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक दान के उपयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे, ताकि लोगों का भरोसा कायम रहे।"

प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया, "मैं पहले भी कह चुका हूं कि भाजपा धोखाधड़ी कर रही है। पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये की लूट हुई है। मैंने पहले भी कहा था कि भगवान राम के नाम पर भाजपा लोगों के साथ धोखा कर रही है। इस मामले में बड़े लोगों की भी भूमिका है।"

SIT जांच के बाद आठ लोगों पर FIR दर्ज

गौरतलब है कि अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामला श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दिए गए नकद दान और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। मंदिर में प्राप्त दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताएं सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने जांच की मांग की थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया।

एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर दान की गणना और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों सहित आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। उन पर आपराधिक विश्वासघात और मंदिर के दान में गबन करने के आरोप लगाए गए हैं।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे से बढ़ा विवाद

विवाद के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा देने की जानकारी दी है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।

इस प्रकरण को लेकर विपक्षी दल सार्वजनिक दान के उपयोग में अधिक पारदर्शिता और कुछ दल उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि मामले की जांच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है।

Navbharat Live
navbharatlive.com