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न्यायपालिका पर वार या इमरजेंसी की यादें? निशिकांत दुबे ने अब खोली कांग्रेस चैप्टर की पुरानी फाइल, देश की सियासत में बवाल तय

गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा है कि कांग्रेस के संविधान बचाओ आंदोलन की एक दिलचस्प कहानी। बहरुल इस्लाम साहब 1951 में असम में कांग्रेस में शामिल हुए। तुष्टिकरण के नाम पर कांग्रेस ने 1962 में राज्यसभा सदस्य बनाया।

  • By विकास कुमार उपाध्याय
Updated On: Apr 22, 2025 | 12:51 PM

निशिकांत दुबे और बहारुल इस्लाम, फोटो - सोशल मीडिया

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नवभारत डिजिटल डेस्क : “ये भाजपा सासंद निशिकांत दुबे रोज-रोज एतना खतरनाक बयान काहे दे रहा है रे बाब…” चाय की दुकान और वहां जमा राजनीतिक चौपाल! एक हाथ में चाय और दूसरे हाथ में मोबाइल में एक्स पोस्ट को देखते हुए बिनोद के इस बात से भले ही वहां मौजूद लोग एक-दूसरे की तरफ देखकर हंसने लगे पर जमीनी हकीकत में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बयानों के कारण लगातार बवाल बढ़ता जा रहा है।

इन दिनों भाजपा सांसद निशिकांत दुबे एक के बाद एक ऐसा बयान दे रहे हैं, जिससे देश की सियासत गरमाई हुई है। अभी निशिकांत दुबे द्वारा दिए गए एक बयान से जो बवाल मचा हुआ है, वो खत्म हुआ ही नहीं कि सांसद दुबे ने एक दूसरा बयान देकर नेशनल मीडिया में हेडलाइन बन गए हैं।

जज की नियुक्ति का हवाला देते हुए कांग्रेस पर हमला

दरअसल, निशिकांत दुबे ने जज की नियुक्ति का हवाला देते हुए कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को कांग्रेस के संविधान बचाओ अभियान का एक मजेदार किस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तंज कसा है। निशिकांत दुबे ने जज बहरुल इस्लाम के बारे में कहा है कि, ‘1977 में उन्होंने इंदिरा गांधी के खिलाफ भ्रष्टाचार के सभी मामलों को बड़ी एकाग्रता से सुलझाया, तब कांग्रेस ने उनसे खुश होकर 1983 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से रिटायर कर दिया और कांग्रेस से तीसरी बार राज्यसभा का सदस्य बनाया।’

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जानिए जज बहरुल इस्लाम की कहानी

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक जज बहरुल इस्लाम 1951 में असम हाई कोर्ट में वकील के तौर पर रजिस्टर्ड हुए और 1958 में सुप्रीम कोर्ट के वकील के तौर पर रजिस्टर्ड हुए। 1962 में वे राज्यसभा के लिए चुने गए और 1968 में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार उन्होंने असम हाई कोर्ट के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में भी प्रैक्टिस की। 20 जनवरी 1972 को उन्हें तत्कालीन असम और नागालैंड हाई कोर्ट (अब गुवाहाटी हाई कोर्ट) का जज नियुक्त किया गया।

11 मार्च 1979 को उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। चार महीने बाद 7 जुलाई 1979 को उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। 1 मार्च 1980 को बहरुल इस्लाम उच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद 4 दिसंबर 1980 को उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। इसके बाद जनवरी 1983 में बहरुल इस्लाम ने सर्वोच्च न्यायालय से इस्तीफा दे दिया।

निशिकांत दुबे का एक्स पोस्ट

पूरे घटनाक्रम को लेकर सासंद दुबे ने क्या लिखा

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अपने एक्स हैंडल पर विस्तार से टिप्पणी की है। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने लिखा है, “कांग्रेस के संविधान बचाओ आंदोलन की एक दिलचस्प कहानी। बहरुल इस्लाम साहब 1951 में असम में कांग्रेस में शामिल हुए। तुष्टिकरण के नाम पर कांग्रेस ने उन्हें 1962 में राज्यसभा सदस्य बनाया। छह साल बाद उनकी सेवा के लिए उन्हें 1968 में फिर से राज्यसभा सदस्य बनाया गया।”

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निशिकांत दुबे ने आगे लिखा, “कांग्रेस को उनसे बड़ा चाटुकार नहीं मिल सकता। उन्हें राज्यसभा से इस्तीफा दिए बिना ही 1972 में हाईकोर्ट का जज बना दिया गया। फिर 1979 में उन्हें असम हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बना दिया गया। बेचारे 1980 में रिटायर हो गए, लेकिन ये कांग्रेस है। जनवरी 1980 में रिटायर होने वाले जज को दिसंबर 1980 में सीधे सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया। 1977 में उन्होंने बड़ी लगन से इंदिरा गांधी के खिलाफ भ्रष्टाचार के सारे मामले खत्म कर दिए। फिर खुश होकर कांग्रेस ने उन्हें 1983 में सुप्रीम कोर्ट से रिटायर कर दिया और 1983 में ही कांग्रेस से तीसरा राज्यसभा सदस्य बना दिया। मैं कुछ कहना चाहता हूं। मैं नहीं बोलूंगा?”

Attack on judiciary or memories of emergency nishikant dubey now opened old file of congress chapter chaos politics

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Published On: Apr 22, 2025 | 12:49 PM

Topics:  

  • Aurangabad Congress
  • BJP
  • Nishikant Dubey
  • Supreme Court

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