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कांवड़ यात्रा के इन 4 प्रकारों में छिपे है खास मायने, जानें हर यात्रा का महत्व

सावन की शुरूआत के साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरूआत होने वाली है। सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का महत्व होता है। सावन के महीने के शुरूआत 11 जुलाई से हो रही है जो 9 अगस्त को समाप्त होगी।

  • By दीपिका पाल
Updated On: Jul 02, 2025 | 09:52 AM
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सावन की शुरूआत के साथ ही कांवड़ यात्रा की शुरूआत होने वाली है। सावन के महीने में भगवान शिव की आराधना का महत्व होता है। सावन के महीने के शुरूआत 11 जुलाई से हो रही है जो 9 अगस्त को समाप्त होगी। कांवड़ यात्रा में भक्त पवित्र नदियों से गंगाजल एकत्रित करके अपने गृह जनपद में आकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। यहां पर यात्रा में भक्त निकलते है तो वहीं पर कांवड़ यात्रा के कई प्रकार भी होते है।

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सामान्य कांवड़ यात्रा - कावड़ यात्रा 4 प्रकार की होती है जिसमें हम पहली कावड़ यात्रा की बात कर रहे है जो सामान्य होती है। इस यात्रा में रूककर आराम किया जा सकता है लेकिन कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता है। इस दौरान कांवड़ को जमीन की बजाय कांवड़ किसी पेड़ पर लटका सकते हैं या फिर स्टैंड पर रख सकते हैं।

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खड़ी कांवड़ - कांवड़ यात्रा का यह तीसरा प्रकार होता है जिस यात्रा में भक्त खड़ी कांवड लेकर चलते हैं। वहीं पर इस यात्रा में कांवड़िए के साथ एक सहयोगी भी होता है, जो उनके साथ चलता है। इस यात्रा का काफी महत्व होता है।

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दांडी कांवड़ - कांवड़ इस यात्रा में भक्त दंड बैठक देते हुए यात्रा पूरी करते हैं, जो बहुत मुश्किल होती है इस यात्रा में महीने भर का समय लगता है।

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कांवड़ यात्रा को लेकर कहा जाता है कि, जब समुद्रमंथन के दौरान विष पान करने से भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया था तब उसके प्रभाव को कम करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। इस यात्रा के दौरान जलाभिषेक से प्रसन्न होकर भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करते है।

These 4 types of kanwar yatra have special meaning hidden in them

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Published On: Jul 02, 2025 | 09:52 AM

Topics:  

  • Kanwariyas
  • Religion
  • Sawan Somwar

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