जन्माष्टमी पर गीता के इन 5 श्लोक का करें पाठ, जीवन की सभी समस्याएं होगी दूर
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव देशभर में 26 अगस्त को मनाया जाने वाला हैं वहीं पर इसे लेकर श्रीकृष्ण मंदिरों में रौनक सजने लगी है तो भक्त पूजा की तैयारी कर रहे हैं। जीवन में सकारात्मक बदलाव पाने के लिए आप भगवद् गीता में बताए इन श्लोकों का पठन कर सकते है।
- Written By: दीपिका पाल
देशभर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव 26 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा इस दिन कान्हाजी का विधि-विधान के साथ पूजन करने के नियम होते है। इस मौके पर आप जीवन की परेशानियों को हल करना चाहते हैं तो कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गीता के 5 ऐसे श्लोक के बारे जान लें, इनसे आपके जीवन में बड़े और सकारात्मक बदलाव आएगें।
अर्थ : आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न आग उसे जला सकती है। न पानी उसे भिगो सकता है, न हवा उसे सुखा सकती है।
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अर्थ: मनुष्य को अपने द्वारा अपना उद्धार करना चाहिये और अपना अध: पतन नहीं करना चाहिये; क्योंकि आत्मा ही आत्मा का मित्र है और आत्मा (मनुष्य स्वयं) ही आत्मा का (अपना) शत्रु है।
अर्थ: क्रोध से मनुष्य की मति मारी जाती है यानी मूढ़ हो जाती है जिससे स्मृति भ्रमित हो जाती है। स्मृति-भ्रम हो जाने से मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो जाती है और बुद्धि का नाश हो जाने पर मनुष्य खुद का अपना ही नाश कर बैठता है।
अर्थ: विषयों वस्तुओं के बारे में सोचते रहने से मनुष्य को उनसे आसक्ति हो जाती है। इससे उनमें कामना यानी इच्छा पैदा होती है और कामनाओं में विघ्न आने से क्रोध की उत्पत्ति होती है।
अर्थ: कर्म करने मात्र में तुम्हारा अधिकार है, फल में कभी नहीं। तुम कर्मफल के हेतु वाले मत होना और अकर्म में भी तुम्हारी आसक्ति न हो।
