सोचना बुरी बात नहीं है। बल्कि सही समय पर सही फैसले लेने के लिए सोचना जरूरी भी है। लेकिन जब यही आदत आपकी नींद, खुशी, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो उस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है। अगर आपको इनमें से कई संकेत अपने अंदर दिखाई देते हैं, तो खुद को दोष देने की बजाय धीरे-धीरे अपनी आदतों में बदलाव लाने की कोशिश करें। रोज थोड़ा टहलें, अपने विचार डायरी में लिखें, स्क्रीन टाइम कम करें, मेडिटेशन करें या किसी भरोसेमंद इंसान से खुलकर बात करें।