Amarnath Yatra: इन 5 पड़ावों को पार किए बिना पूरी नहीं होती अमरनाथ यात्रा, हर एक जगह पर है शिवजी का अहसास
अमरनाथ यात्रा करने का प्लान आप इस बार कर रहे हैं तो आप इन पांच जगहों को पार करना नहीं भूलें। यहां पर यात्रा के दौरान पड़ने वाले ये 6 पड़ाव भगवान शिव के होने का अहसास कराते है और सुकून मिलता है।
- Written By: दीपिका पाल
Amarnath Yatra 2025: जम्मू-कश्मीर की वादियों में बसे बाबा अमरनाथ के बारे में तो आप जानते है। यहां पर अमरनाथ यात्रा की शुरूआत 25 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त तक होने वाली है। इसके लिए 14 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू हो गए है। अमरनाथ यात्रा करने का प्लान आप इस बार कर रहे हैं तो आप इन पांच जगहों को पार करना नहीं भूलें। यहां पर यात्रा के दौरान पड़ने वाले ये 6 पड़ाव भगवान शिव के होने का अहसास कराते है और सुकून मिलता है।
पहलगाम- आप अमरनाथ यात्रा शुरू करते हैं तो आपको सबसे पहले यह स्थान मिलता है। कहते हैं पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुनाने के लिए एक गुप्त स्थान की तलाश कर रहे थे तो सबसे पहले उन्होंने नंदी को छोड़ दिया था। इस वजह से इस जगह का खास महत्व है।
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चंदनबाड़ी- अमरनाथ यात्रा के दूसरे पड़ाव की बात करें तो यहां के हर कण-कण में शिवाय है। मान्यता है कि जिस स्थान पर उन्होंने चंद्रमा को खुद से अलग किया उस स्थान को चंदनबाड़ी कहा जाता है। इसके अलावा भगवान शिव ने चंद्रमा के साथ साथ अपने माथे पर लगी चंदन और भभूत को भी उतार कर रख दिया था। इस जगह की मिट्टी को माथे पर लगाने का महत्व होता है।
पिस्सू घाटी- अमरनाथ यात्रा के तीसरे पड़ाव की ओर आप बढ़ते हैं तो यहां पर तक पहुंचते पहुंचते यात्रियों की चाल पिस्सू जैसी हो जाती है। इसलिए इसे पिस्सू घाटी कहा जाता है। इसे लेकर पौराणिक कथा में मान्यता है कि, एक बार देवता और राक्षस भगवान शिव के दर्शन करने के लिए आ थे। पहले आगे बढ़ने की ईर्ष्या में दोनों आपस में ही युद्ध करने लगे। इस वजह से देवताओं ने राक्षसों को पिस्सू की तरह मारा तब से इसे पिस्सू घाटी कहा जाने लगा।
शेष नाग झील- अमरनाथ यात्रा के इस पड़ाव का भी महत्व है। अमरनाथ की यात्रा के दौरान शिवजी ने यहां अपने गले से सर्प उतार दिया था। ऐसी मान्यताएं हैं कि 24 घंटे में से एक बार शेषनाग इस झील में दर्शन देते हैं। यानि यहां कि, झील की बनावट शेष नाग के आकार की है।
महागुणस पर्वत- अमरनाथ यात्रा के इस स्थान का नाता श्रीगणेश से है। यानि यहां पर भोलेनाथ ने यहां पर अपने पुत्र गणेश को बैठा दिया था। इसलिए इस स्थान को महागणेश पर्वत या गणेश टॉप भी कहा जाता है। यह विशालकाय पर्वत हरे और भूरे रंग का है और खूबसूरती में अव्वल है।
पंचतरणी- आप अमरनाथ यात्रा के दौरान अगली जगह इस स्थान पर आ सकते है। यहां पर यहां पांच अलग अलग धाराओं में पांच नदियां बहती हैं। जिन्हें पार करने के बाद यात्री आगे बढ़ते हैं। पौराणिक कथाओं में यह भी वर्णन है कि, यहां शिव जी की जटाएं पांच दिशाओं में फैली हुई थी और ये पांच धाराएं उन्हीं की जटाओं का प्रतीक हैं।
इस जगह से आगे चलने पर आगे तीन कि.मी का मार्ग एक बर्फीली मार्ग है। यहां पैदल चलने का मार्ग भी बर्फ के पुल से होकर गुजरता है। कहते हैं कि, बर्फानी शिवलिंग के दर्शन बिना किसी द्वार या प्रतिबंधों के, पर्वत के बीच बनी 20 फीट लंबी तीस फीट चौड़ी और लगभग 15 फीट ऊंची गुफा के अंदर भगवान शिव का प्राकृतिक शिवलिंग है।
