

CEO RS Gopalan Odisha SIR Update: ओडिशा में आज से मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू हो गई। यह अगले महीने तक चलेगी। इस दौरान बीएलओ पूरे राज्य में घर-घर जाकर सत्यापन अभियान चलाएंगे, जिससे कि वे गणना फॉर्म वितरित कर सकें, उन्हें भरने में लोगों की सहायता कर सकें और भरे हुए फॉर्म वापस जमा कर सकें।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने शुक्रवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि 30 मई से शुरू होने वाली घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया 28 जून तक पूरी कर ली जाएगी।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आरएस गोपालन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि अब तक 33,000 बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त किए जा चुके हैं और वे वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। मतदाताओं की सहायता के लिए हेल्प डेस्क भी सक्रिय कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो मतदाता डिजिटल माध्यम को प्राथमिकता देते हैं, वे गणना फॉर्म सीधे चुनाव आयोग की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं और भरे हुए फॉर्म को ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं।
सीईओ गोपालन ने बताया कि ओडिशा में 20 मई को SIR शुरू हुआ। 30 मई से 28 जून तक BLO घर-घर जाकर लोगों से मिलेंगे। वे शाम को 3 बजे से 5 बजे तक बूथ पर भी उपलब्ध रहेंगे। उनका काम 2025 की मतदाता सूची में शामिल सभी मतदाताओं को गणना फॉर्म वितरित करना, उसे भरवाना और वापस जमा करना है। फॉर्म वापस जमा होने के बाद 5 जुलाई को मसौदा सूची प्रकाशित की जाएगी।
इसके बाद, हम दावों और आपत्तियों को आमंत्रित करेंगे। दावों और आपत्तियों को दर्ज करने की अंतिम तिथि 4 अगस्त है। उसके बाद, एक महीने तक सभी दावों और आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी, उनकी जांच-पड़ताल होगी और उनका निपटारा किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची 6 सितंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
जाने-माने सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कल पुरी के नीलाद्री बीच पर SIR के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सैंड आर्ट बनाया। सभी BLO आज (30 मई) से 28 जून तक घर-घर जाकर लोगों से मिलेंगे। इसकी प्रशंसा करते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आर.एस. गोपालन कहते हैं, हम सुदर्शन पटनायक के उनकी खूबसूरत रेत कला के लिए आभारी हैं।
एसआईआर प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए पूरे राज्य में 45,255 बीएलओ तैनात किए गए हैं। इस कार्य के लिए उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया गया है।
सीईओ गोपालन ने कहा, असल में ज्यादातर लॉजिकल गलतियां छोटी होती हैं, जैसे उम्र में अंतर, नाम में अंतर। इन्हें फील्ड जांच में सिर्फ एक पंचनामे के जरिए ठीक किया जा सकता है। गंभीर गलतियों के लिए वोटर से सहायक सबूत देने के लिए कहा जा सकता है। अगर कोई सहायक सबूत नहीं भी है, तो भी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर फैसला ले सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि सबूत न होने का मतलब यह नहीं है कि वोटर अयोग्य है। जो मतदाता अभी अपने घरों से दूर हैं, उनके लिए सीईओ ने पुष्टि की कि परिवार के सदस्य उनकी तरफ से एन्यूमरेशन फॉर्म ले सकते हैं और उनके लिए उस पर दस्तखत कर सकते हैं।