

Mizoram Foundation Day 2026 History : पहाड़ों की गोद में बसा और बादलों से बातें करता मिजोरम आज अपना 39वां स्थापना दिवस मना रहा है। 20 फरवरी 2026 को यह खूबसूरत पहाड़ी राज्य अपनी विकास यात्रा के 40वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। क्षेत्रफल के लिहाज से देश का पांचवां सबसे छोटा राज्य होने के बावजूद भारतीय संघ का यह 23वां राज्य अपनी अनूठी परंपराओं, जनजातीय संस्कृति और नैसर्गिक वादियों के लिए सेवन सिस्टर्स (पूर्वोत्तर के सात राज्य) में विशेष स्थान रखता है।
आइए, मिजोरम के स्थापना दिवस पर इस 'शांति के टापू' से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जानते हैं, जो न केवल दिलचस्प हैं बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
क्या आप जानते हैं कि 'मिजोरम' शब्द का जन्म कैसे हुआ? स्थानीय भाषा में इसका अर्थ है-पहाड़ी लोगों की भूमि।
'मि' का अर्थ है लोग।
'जो' का अर्थ है पहाड़।
'रम' का अर्थ है भूमि।
आजादी से पहले और उसके कुछ समय बाद तक इस क्षेत्र को लुशाई हिल्स के नाम से जाना जाता था। 1954 में कानून बदलकर इसका नाम 'मिजो हिल्स' किया गया। 1972 में केंद्र सरकार ने इसे केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया और 20 फरवरी 1987 को यह असम से अलग होकर भारत का पूर्ण राज्य बन गया। दिलचस्प बात यह है कि अरुणाचल प्रदेश भी इसी दिन पूर्ण राज्य बना था, इसलिए दोनों राज्यों का जन्मदिन एक ही है।
कम आबादी, उच्च साक्षरता: सिक्किम के बाद मिजोरम भारत का दूसरा सबसे कम आबादी वाला राज्य है, लेकिन शिक्षा के मामले में यह अव्वल है। यहां की साक्षरता दर 91.58% है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
उल्टी बहने वाली नदी : मिजोरम की सबसे बड़ी नदी छिमतुईपुई का व्यवहार बड़ा अनोखा है। यह म्यांमार से निकलकर मिजोरम में दाखिल होती है और फिर यू-टर्न लेकर वापस म्यांमार चली जाती है।
जनजातीय बाहुल्य : मिजोरम में जनजातियों की संख्या सबसे अधिक है। यहां की मुख्य जनजाति 'मिजो' है, जिन्हें संविधान में अनुसूचित जनजाति के रूप में विशेष संरक्षण प्राप्त है।
जंगलों का साम्राज्य : राज्य का लगभग 84.53% हिस्सा वनों से ढका हुआ है। यहां की भूमि उपजाऊ है, लेकिन केवल 2% हिस्सा ही बंजर है।
राज्य के प्रतीक : यहां का राज्य फूल लाल वांडा (ऑर्किड) है, राज्य पशु हिमालयन सेरो और राज्य पक्षी ह्यूम तीतर है।
पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। हालांकि, यहां साक्षरता दर बहुत अधिक है, लेकिन भौगोलिक दुर्गमता के कारण आज भी लगभग 20 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है। मिजोरम सरकार अब पर्यटन और बांस उद्योग के जरिए राज्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का प्रयास कर रही है।