मणिपुर में शांति की पहली दस्तक! नए CM खेमचंद से मिले कुकी-जो नेता; बीरेन सिंह को लेकर कही यह बड़ी बात

Manipur Violence: राज्य में एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी में नई सरकार बनने पर केजेडसी ने कुकी-जोमी-हमार समुदाय के उन विधायकों का सामाजिक बहिष्कार घोषित किया था।
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यमनाम खेमचंद, (डिजाइन फोटो/नवभारत लाइव डॉट कॉम)
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Manipur CM Y Khemchand Singh: मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने शनिवार शाम को गुवाहाटी में चुराचंदपुर में स्थित सिविल सोसायटी ऑर्गेनाइजेशन कुकी जो काउंसिंल (KZC) के नेताओं के साथ बैठक की। मई 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से यह पहली बार है कि राज्य के किसी मुख्यमंत्री ने इस निकाय से मुलाकात की है और बातचीत की है।

सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन (SOO) व्यवस्था के तहत आने वाले विद्रोही समूह केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में लगे हुए हैं, जिसके दौरान वे एक केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एक अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं। लगभग एक घंटे और 45 मिनट तक चली इस बैठक में भाग लेने वाले केजेडसी नेताओं ने इसे एक आइस ब्रेकर मीटिंग बताया और भविष्य में और ज्यादा बातचीत की संभावना का संकेत दिया।

मुख्यमंत्री सचिव ने लिखा था पत्र

इस हफ्ते की शुरुआत में मुख्यमंत्री के सचिव ने केजेडसी के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट को पत्र लिखकर गुवाहाटी में उनसे और केजेडसी के अन्य सदस्यों से मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने से संबंधित मामलों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक का अनुरोध किया। थांगलेट ने कहा कि अगर बीरेन सिंह मुख्यमंत्री होते तो हम बैठक में शामिल नहीं होते। नई सरकार बनने के कारण हम आए।

राष्ट्रपति शासन के बाद नई सरकार

राज्य में एक साल के राष्ट्रपति शासन के बाद फरवरी में नई सरकार बनने पर केजेडसी ने कुकी-जोमी-हमार समुदाय के उन विधायकों का सामाजिक बहिष्कार घोषित किया था जिन्होंने नई सरकार में शामिल होने का फैसला किया था। शनिवार की बैठक के बाद थांगलेट ने कहा कि बैठक में कोई प्रस्ताव या समझौता नहीं हुआ। हमने अपनी मांगों पर चर्चा की और शायद उन पर चर्चा के लिए और बैठकें होंगी।

बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा

एक बयान में, केजेडसी ने कहा कि बैठक में उठाए गए मुद्दों में उखरुल जिले में कुकी और तांगखुल समुदायों के बीच तनाव कम करने की आवश्यकता शामिल थी, जहां पिछले महीने से हिंसा जारी है। साथ ही राजनीतिक समाधान होने तक बफर जोन की पवित्रता बनाए रखना भी शामिल था। यह क्षेत्र मैतेई आबादी वाले क्षेत्रों और कुकी-जो आबादी वाले क्षेत्रों के बीच मौजूद है। इसमें यह भी कहा गया कि किसी भी सार्थक शांति और सुलह प्रक्रिया के लिए संघर्ष के पीड़ितों को न्याय दिलाना अनिवार्य है।

राज्य में शांति पर नई सरकार का ध्यान

केजेडसी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने इन मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और उन्होंने अपनी चिंताओं, प्रतिबद्धताओं और मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को साझा किया। 4 फरवरी को सत्ता संभालने के बाद से, खेमचंद के नेतृत्व वाली नई राज्य सरकार का ध्यान इस गहरे रूप से विभाजित राज्य में संपर्क और सुलह पर रहा है।

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