अरुणाचल से असम तक फैला शराब तस्करी का 'जाल', ED की रेड में हुआ खुलासा; सरकार की मुहरें भी हुईं बरामद

Arunachal Pradesh liquor Smuggling: ईडी के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने गुरुवार (23 अप्रैल) को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह सर्च ऑपरेशन चलाया।
Liquor Smuggling 'Nexus' Spanning from Arunachal to Assam Exposed During ED Raids; Government Seals Also Recovered
ईडी रेड (सोर्स- आईएएनएस)
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ED Raids Arunachal Pradesh liquor Smuggling: केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरुणाचल प्रदेश में कथित बड़े अवैध शराब तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में नौ ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई थोक शराब कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर की गई। ईडी के गुवाहाटी जोनल कार्यालय ने गुरुवार (23 अप्रैल) को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह सर्च ऑपरेशन चलाया। छापेमारी ईटानगर, नाहरलगुन, सेप्पा, जीरो, दापोरिजो, नामसाई और रोइंग में की गई।

एजेंसी ने शनिवार को जारी बयान में बताया कि जांच की शुरुआत असम पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर हुई थी, जिनमें अरुणाचल प्रदेश से असम में अवैध शराब परिवहन और तस्करी के मामले सामने आए थे। इसके अलावा असम आबकारी विभाग से भी संदर्भ प्राप्त हुआ था।

आदिवासी साझेदारी-डमी लाइसेंस का इस्तेमाल

मामले पर ईडी ने 17 अक्टूबर 2024 को मामला दर्ज किया था, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए 173 अतिरिक्त एफआईआर को भी शामिल किया गया। इससे पहले 4 फरवरी 2025 को अरुणाचल प्रदेश के तीन प्रमुख शराब निर्माताओं के परिसरों पर छापेमारी की गई थी, जिन्हें इस नेटवर्क का सरगना माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि यह सिंडिकेट राज्यों के बीच आबकारी शुल्क में अंतर का फायदा उठाकर शराब की तस्करी करता था। ईडी के अनुसार, नेटवर्क में निर्माता, बॉन्डेड वेयरहाउस और थोक कारोबारी शामिल थे। इस मामले में लाभकारी स्वामित्व को छिपाने के लिए आदिवासी साझेदारी और डमी लाइसेंस धारकों का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि अरुणाचल प्रदेश के लिए निर्धारित शराब को असम और अन्य राज्यों में अवैध रूप से बेचा जाता था।

डमी लाइसेंस से चलाई इकाई

जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय की जांच में अब तक पता चला है कि तीन मुख्य आरोपी 25 से अधिक संस्थाओं को नियंत्रित करते हैं। हर इकाई स्थानीय लोगों के नाम पर बेनामी या डमी लाइसेंस से चलाई जा रही थी, जबकि असली वित्तीय और प्रबंधकीय नियंत्रण सरगनाओं के पास था। ईडी ने बताया कि जांचे गए बैंक खातों में कुल जमा राशि का 51 प्रतिशत से 90 प्रतिशत हिस्सा संदिग्ध नकद जमा के रूप में मिला। साथ ही 2 लाख रुपये से कम के बिलों में सुनियोजित तरीके से इनवॉइस बांटे गए। एक स्थान पर एक ही महीने में 1,99,554 रुपये के 200 से अधिक बिल पाए गए।

40 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी जब्त

छापेमारी के दौरान ऑन-साइट मैनेजरों ने भी मुख्य आरोपियों के नियंत्रण की पुष्टि की। बहीखाते, स्टॉक रजिस्टर और दैनिक नकदी संग्रह सरगनाओं के केंद्रीय कार्यालयों में भेजे जाते थे। कार्रवाई के दौरान करीब 40 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी भी जब्त की गई। इसके अलावा एक परिसर से 14 मुहरें बरामद हुईं, जिनमें “आबकारी विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार” की मुहरें भी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका है कि इनका इस्तेमाल फर्जी परिवहन परमिट बनाने में किया जाता था। ईडी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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