देबब्रत सैकिया और राहुल गांधी।
Assam Congress News : असम की राजनीति में इन दिनों वफादारी और सियासी महात्वाकांक्षाओं के बीच एक ऐसी जंग छिड़ी है, जिसने कांग्रेस के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोराह के पाला बदलने के बाद अब राज्य के सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अगला नंबर देबब्रत सैकिया का है?
चुनाव आयोग द्वारा 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों (जिसमें असम की 3 सीटें शामिल हैं) के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। चर्चा है कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया बीजेपी के संपर्क में हैं। इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सैकिया एक राज्यसभा सीट के बदले भगवा चोला ओढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। वैसे, इन खबरों पर अभी तक कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन असम का वर्तमान राजनीतिक माहौल ऐसा है कि यहां की अटकलें अक्सर हकीकत में बदल रही हैं।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन चर्चाओं में तड़का लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने तीनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार लगभग तय कर लिए हैं। सैकिया पर चुटकी लेते हुए सीएम ने कहा कि पिछले पांच वर्षों से सैकिया यही कह रहे हैं कि उनकी मां उन्हें पाला बदलने नहीं दे रही हैं, वरना उन्हें बीजेपी में आने से परहेज नहीं था। मगर, हमारे पास कोई वैकेंसी नहीं है। मुख्यमंत्री का यह बयान इशारा करता है कि बीजेपी ऊपरी तौर पर भले ही इनकार करे, लेकिन पर्दे के पीछे की खिचड़ी कुछ और ही हो सकती है।
इन चर्चाओं पर देबब्रत सैकिया ने सीधा खंडन करने के बजाय इसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भ्रमित करने की साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि मुझे इन सब बातों का पता नहीं है, ये केवल अंदाजे हैं। हालांकि, विचारधारा की दुहाई देते हुए उन्होंने बीजेपी में शामिल होने की बात से इनकार भी किया। भूपेन बोरा के जाने पर उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह उनके मार्गदर्शक रहे हैं, लेकिन वे अपनी राह खुद चुनेंगे।
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अगर सैकिया जैसा कद्दावर नेता पाला बदलता है तो यह कांग्रेस के लिए भूपेन बोरा से भी बड़ा झटका होगा। सैकिया न केवल नेता प्रतिपक्ष हैं, बल्कि असम कांग्रेस के सबसे विश्वसनीय चेहरों में से एक रहे हैं। भूपेन बोरा के बाद सैकिया भी हाथ का साथ छोड़ते हैं तो असम में कांग्रेस बिना सेनापति वाली सेना बनकर रह जाएगी।