यश चोपड़ा कभी बनना चाहते थे इंजीनियर, लेकिन बन गए रोमांटिक फिल्मों के बादशाह
बॉलीवुड के मशहूर निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ था। 27 सितंबर को यश चोपड़ा की बर्थ एनिवर्सरी है। यश चोपड़ा ने अपनी सुपरहिट फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था।
- Written By: सोनाली झा
यश चोपड़ा की 92वीं बर्थ एनिवर्सरी
मुंबई: बॉलीवुड के मशहूर निर्माता निर्देशक यश चोपड़ा जन्म 27 सितंबर 1932 को लाहौर में हुआ था। 27 सितंबर को यश चोपड़ा की बर्थ एनिवर्सरी है। यश चोपड़ा ने अपनी सुपरहिट फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया था। उनकी हर फिल्म को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। इसलिए उनकी फिल्में आज भी लोगों को काफी पसंद हैं। यश चोपड़ा के बर्थडे के खास मौके पर जानते हैं उनसे जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा…
यश चोपड़ा ने अपनी शादी के कुछ समय बाद अपने बड़े भाई के बैनर बीआर फिल्म से खुद अलग कर यशराज फिल्म की स्थापना की। इस घटना ने बीआर के सपनो को चूर-चूर कर दिया। क्योंकि वे अपने परिवार को जीते जी दो धड़ो में बंटते नहीं देखना चाहते थे। यश जी को सीनियर चोपड़ा बेइंतहा प्यार करते थे। वो उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। लेकिन यश जी की रोमांटिक कल्पना इतनी सधी हुई थी कि बीआर चोपड़ा ने उन्हें फिल्मों में लाना ही बेहतर समझा।
बीआर चोपड़ा ने यश को न केवल फिल्म विधा का पाठ पढ़ाया, बल्कि उन्हें यहां स्थापित करने के लिए करोड़ो रुपये का दांव पर लगाकर फिल्में भी बनाई।बीआर ने यश को धूल का फूल में निर्देशन का पहला अवसर दिया था। तब उन्हें फिल्म की अलग थीम के कारण लोगो ने यहां तक घोषणा कर दी की यह बीआर की आखिरी फिल्म होगी।
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निर्देशक के रूप में यश का नाम आने के बाद वितरकों ने भी फिल्म से हाथ खींच लिये। एक बोल्ड फिल्म बनाने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर बीआर जैसे अनुभवी निदेर्शक पर तो विश्वास कर सकते थे, लेकिन यशजी पर भरोसा करने को कतई तैयार नहीं थे, पर बीआर चोपड़ा टस से मस नहीं हुए। यह फिल्म उनकी भावनाओं से जुड़ी थी, क्योंकि इसके द्वारा उनका छोटा भाई अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहा था।
यश चोपड़ा के लिए सीनियर चोपड़ा ने राजकुमार जैसे बड़े स्टार से भी पंगा मोल ले लिया। धूल का फूल की सफलता में कोई कोर-कसर बाकी न रहे इसलिए बीआर चोपड़ा ने राजकुमार जैसे स्टार को मुहमांगी कीमत पर साइन किया। चूंकि यश चोपड़ा नए थे ,इसीलिए राजकुमार ने बीआर पर दबाव डाला कि उन्हें शूटिंग के समय हमेशा सेट पर मौजूद रहना होगा।
यश चोपड़ा को जब यह बात मालूम पड़ी तो उन्होंने बीआर चोपड़ा से कहकर राजकुमार को फिल्म से चलता कर अशोक कुमार को ले लिया। समस्त चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उन्होंने यह फिल्म पूरी की। ‘धूल का फूल’ ने सफलता का जो इतिहास रचा वह एक अलग कहानी है। ‘धूल का फूल’ के साथ यश चोपड़ा इंडस्ट्री में स्थापित हो गए। बीआर चोपड़ा खुश थे कि उन्होंने छोटे भाई के प्रति अपना फर्ज किया।
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