खाड़ी देशों में तनाव का बाजार में पड़ा असर, यवतमाल में किसानों पर पड़ी मार, सामूहिक आंदोलन का किया ऐलान
Yavatmal Wheat Market Price: खाड़ी देशों के तनाव से यवतमाल के किसान संकट में! गेहूं के दाम गिरकर ₹1800 तक पहुंचे। MSP से कम भाव मिलने पर आजाद मैदान में किसानों का सामूहिक उपवास।
- Written By: प्रिया जैस
किसानों का हुआ नुकसान (सौजन्य-नवभारत)
Gulf War Impact on Agriculture: खाड़ी देशों में बढ़ते युद्ध जैसे तनाव का असर अब ग्रामीण बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। ईरान, इराक और अमेरिका के बीच बनी तनावपूर्ण स्थिति के कारण वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका सीधा प्रभाव विदर्भ के कृषि बाजारों पर पड़ रहा है। यवतमाल जिले में रबी सीजन के गेहूं को अपेक्षित भाव नहीं मिल रहा, जिससे किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं।
हर साल रबी सीजन में गेहूं को लगभग 2800 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता था, लेकिन इस बार निजी बाजार में केवल 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए गेहूं का 2325 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया है, लेकिन कई जगह किसानों को इससे कम कीमत पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ रही है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है।
किसानों को झेलना पड़ा भारी नुकसान
यवतमाल जिले के यवतमाल, बाभुलगांव, कलंब, दारव्हा, दिग्रस, आर्णी, घाटंजी, रालेगांव, वणी, झरी-जामणी, पुसद, उमरखेड़, महागांव, नेर और केलापुर जैसे क्षेत्रों में खरीफ सीजन में कपास और सोयाबीन प्रमुख नकदी फसलें हैं, जबकि रबी में गेहूं और चना बोया जाता है। इस साल खरीफ सीजन में ही किसानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।
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अगस्त और सितंबर में हुई भारी बारिश से कपास और सोयाबीन की फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे उत्पादन घटा। इसके अलावा कुछ इलाकों में ओलावृष्टि ने भी फसलों को नुकसान पहुंचाया। अब रबी फसल हाथ में आने के बाद भी गेहूं के कम दाम मिलने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
एक दिवसीय सामूहिक आंदोलन किया
इसी पृष्ठभूमि में शहर के आजाद मैदान में शेतकरी आंदोलन यवतमाल के बैनर तले एक दिवसीय सामूहिक उपवास आंदोलन किया गया। आंदोलन के कार्यकर्ता प्रा. पंढरी पाठे ने जिले के कई गांवों का दौरा कर किसानों से संवाद किया और गेहूं, चना समेत अन्य फसलों के बाजार भाव की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि वैश्विक अस्थिरता और स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं का दोहरा असर किसानों पर पड़ रहा है।
