यवतमाल में जलसंकट का खतरा, जल परियोजनाओं का जलसंग्रह 72.42% पर पहुंचा, बोरवेल और कुओं की खुदाई पर प्रतिबंध

Yavatmal Water Crisis: यवतमाल में इस वर्ष मानसून के दौरान बारिश में लंबे अंतराल के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जल परियोजनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में जलसंग्रह में भारी गिरावट दर्ज की है।
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यवतमाल जलसंकट(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • यवतमाल जिले की 73 जल परियोजनाओं में वर्तमान में कुल 72.42 प्रतिशत पानी उपलब्ध है।

  • तीन बड़ी परियोजनाओं में जलसंग्रह 95।68 प्रतिशत से घटकर 64.34 प्रतिशत रह गया है।

  • संभावित गर्मी के जलसंकट को देखते हुए उपलब्ध पानी को पेयजल और नल जलापूर्ति योजनाओं के लिए प्राथमिकता दी जाएगी।

Yavatmal Reservoir Storage: मानसून की विदाई के दौरान बारिश ने साथ छोड़ दिया, जिससे इस वर्ष जिले में सूखे जैसी स्थिति निर्माण हो गई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष जल परियोजनाओं के जलसंग्रह में भारी गिरावट दर्ज की गई है। संभावित जलसंकट को देखते हुए प्रशासन ने जिले की जल परियोजनाओं से पानी का उपसा नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

आगामी दिनों में पानी की किल्लत की आशंका के चलते यवतमाल शहर में कहीं एक दिन तो कहीं 3 दिन के अंतराल पर जलापूर्ति की जा रही है। वर्तमान में जिले की 73 जल परियोजनाओं में कुल 72.42 प्रतिशत जलसंग्रह उपलब्ध है।

जलापूर्ति में कटौती

यवतमाल शहर में महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के करीब 45 हजार नल कनेक्शन हैं। इन कनेक्शनों को निलोना, चापडोह और बेंचला परियोजनाओं से पानी की आपूर्ति की जाती है। फिलहाल निलोना और चापडोह परियोजनाएं भरी हुई हैं, लेकिन संभावित जलसंकट को देखते हुए प्रशासन ने सिंचाई के लिए होने वाली जलापूर्ति में कटौती की है।

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जलसंग्रह की स्थिति चिंताजनक

जिले में जलसंग्रह की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। पिछले वर्ष की तुलना में बड़ी और मध्यम जल परियोजनाओं में पानी का स्तर काफी कम हुआ है। जिले की 3 बड़ी परियोजनाओं में वर्तमान में 64.34 प्रतिशत जलसंग्रह है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 95.68 प्रतिशत था। इस तरह बड़ी परियोजनाओं के जलसंग्रह में 31.34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इसी तरह जिले की 7 मध्यम र परियोजनाओं में फिलहाल 79.38 प्रतिशत जलसंग्रह है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में ये परियोजनाएं 100 प्रतिशत भरी हुई थीं। इस प्रकार मध्यम परियोजनाओं के जलसंग्रह में 20.62 प्रतिशत की कमी आई है।

दूसरी ओर, लघु परियोजनाओं में जलसंग्रह की स्थिति तुलनात्मक रूप से संतोषजनक है। इन परियोजनाओं में वर्तमान में 80.12 प्रतिशत जलसंग्रह है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 79.77 प्रतिशत था। यानी लघु परियोजनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। आगामी सूखे को देखते हुए प्रशासन ने पानी पेयजल के लिए आरक्षित रखने का निर्णय लिया है। वहीं, जीवन प्राधिकरणा की ओर से शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कहीं 1, 2, 3 तो कहीं 5 दिन के अंतराल पक जलापूर्ति की जा रहीं है।

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पेयजल के लिए जलसंग्रह आरक्षित

बरिश में लंबे अंतराल के कारण भूजल स्तर में भारी गिरावट आने की बात वरिष्ठ भूवैज्ञानिक अधिकारियों की 27 सितंबर की रिपोर्ट में सामने आई है। इसे ध्यान में रखते हुए उपलब्ध जलसंग्रह को केवल पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया गया है। जल परियोजनाओं में उपलब्ध पानी को टैंकर भरने तथा क्षेत्रीय नल जलापूर्ति योजनाओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर आरक्षित रखा जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य आगामी गर्मियों में नागरिकों को पेयजल की समस्या से बचाना है।

यवतमाल में बोरवेल और कुओं की खुदाई पर प्रतिबंध

इस वर्ष खरीफ सीजन में बारिश के लंबे अंतराल और भूजल स्तर में आई गिरावट को देखते हुए आगामी गर्मियों में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत यवतमाल जिले में सार्वजनिक पेयजल स्रोतों से 500 मीटर के दायरे में नए कुएं या बोरवेल की खुदाई पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा जिले की जल परियोजनाओं, नदियों, नालों, कोल्हापुरी पद्धति के बांधों और अन्य सार्वजनिक जलस्रोतों से औद्योगिक एवं व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए पानी निकालने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

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