नासिक के दत्तनगर में जहरीले पानी पर NHRC सख्त, महाराष्ट्र सरकार से 2 सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

Nashik Dattanagar Water Pollution NHRC Notice: नासिक के दत्तनगर में दूषित भूजल की शिकायत पर NHRC सख्त। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को दो सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश, MPCB से भी जवाब तलब।
Nashik Groundwater Contamination Ambad MIDC
नासिक दत्तनगर वॉटर पॉल्यूशनसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • नासिक के दत्तनगर में दूषित भूजल की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान।

  • महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को दो सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश।

  • अंबड औद्योगिक क्षेत्र के कारखानों के रासायनिक अपशिष्ट से भूजल प्रदूषण का आरोप।

  • शुद्ध पेयजल खरीदने पर हर महीने करीब ₹5,000 खर्च होने का दावा।

  • प्रभावित नागरिकों के लिए जांच, उपचार, मुआवजे और स्वच्छ पेयजल की मांग।

Nashik Groundwater Contamination Ambad MIDC: नासिक के अंबड औद्योगिक क्षेत्र से सटे दत्तनगर में दूषित भूजल से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है। आयोग ने मुख्य सचिव को दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल से भी जवाब तलब किया गया है।

दत्तनगर में दूषित भूजल की शिकायत पर आयोग सख्त

नासिक,अंबड औद्योगिक क्षेत्र से सटे दत्तनगर में दूषित भूजल से नागरिकों के स्वास्थ्य पर खतरे की शिकायत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीरता से लिया है। त्वचा रोगों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ शुद्ध पेयजल खरीदने पर बढ़ते खर्च की शिकायत के बाद आयोग ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है।

आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) से भी इस मामले में जवाब मांगा गया है।

रासायनिक अपशिष्ट से भूजल प्रदूषित होने का आरोप

शिकायत के अनुसार, अंबड औद्योगिक क्षेत्र के कुछ कारखानों से निकलने वाले रासायनिक अपशिष्ट जल का कथित तौर पर उचित शोधन किए बिना निस्तारण किया जा रहा है। इससे आसपास के रिहायशी इलाकों का भूजल प्रदूषित होने का आरोप लगाया गया है।

दत्तनगर में बोरवेल के पानी का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों को त्वचा संबंधी समस्याएं, पेट दर्द और अन्य स्वास्थ्य परेशानियां होने की बात शिकायत में कही गई है। हालांकि, इन समस्याओं और भूजल प्रदूषण के बीच संबंध की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्ट से होना आवश्यक है।

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शुद्ध पानी के लिए हर महीने 5 हजार खर्च

शिकायतकर्ता गौरव पाटील के अनुसार, स्थानीय नागरिकों को सुरक्षित पेयजल खरीदने के लिए हर महीने करीब 5,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के उपचार पर होने वाला खर्च भी परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है।

शिकायतकर्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के विद्यार्थी हैं। उन्होंने अपनी शिकायत के साथ मीडिया में प्रकाशित खबरों की कतरनें भी आयोग को सौंपी थीं।

स्कूल और गर्भधारण को लेकर भी चिंता

मीडिया रिपोर्टों में दूषित पानी के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उल्लेख किया गया है। कुछ रिपोर्टों में विद्यार्थियों को स्कूल नहीं जाने और महिलाओं को गर्भधारण टालने की सलाह दिए जाने की बात भी सामने आई है।

आयोग ने संकेत दिया है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में सामने आए तथ्य सही पाए जाते हैं, तो मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभागों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

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मुआवजे और मुफ्त उपचार की मांग

गौरव पाटील ने प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक मुआवजा देने, भूजल की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले कारखानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा नागरिकों को मुफ्त दवाएं और उपचार देने का अनुरोध किया गया है।

शिकायत के अनुसार, स्थानीय नागरिक महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल औरनासिक महानगरपालिका को पहले भी ज्ञापन दे चुके हैं। अब राज्य सरकार और संबंधित विभागों की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि प्रदूषण की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की गई है और प्रभावित नागरिकों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

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