यवतमाल में महावितरण के कार्यकारी अभियंता रिश्वत लेते गिरफ्तार, 4 लाख रुपये की मांगी थी रिश्वत

Mahavitaran Engineer Bribe: यवतमाल के पुसद में एसीबी ने महावितरण के कार्यकारी अभियंता जनार्दन चव्हाण को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। ठेकेदार से रिश्वत मांगी थी।
Yavatmal Mahavitaran Engineer Bribe
महावितरण के इंजीनियर को रिश्वत लेते ACB ने गिरफ्तार किया(सोर्स: AI)
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Yavatmal Mahavitaran Engineer Bribe: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) अमरावती की टीम ने महावितरण के कार्यकारी अभियंता जनार्दन लालू चव्हाण (57) को चार लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया।

यह कार्रवाई 14 अगस्त की शाम करीब 7.15 बजे विद्युत भवन, पुसद स्थित कार्यकारी अभियंता के क्वार्टर में की गई, एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता 33 वर्षीय ठेकेदार है।

बिल भुगतान के लिए मांगी 4 लाख की रिश्व

महावितरण के पुसद उपविभाग में ब्रेकडाउन और मेंटेनेंस से जुड़े करीब 20 लाख रुपये मूल्य के नौ वर्क ऑर्डर जारी किए गए थे। इन कार्यों को पूरा करने के बाद ठेकेदार के बिलों की राशि मंजूर कराने और भुगतान दिलाने के लिए कार्यकारी अभियंता जनार्दन चव्हाण ने कथित तौर पर रिश्वत की मांग की।

एसीबी के अनुसार, चव्हाण ने कुल बिल राशि का 20 प्रतिशत हिस्सा रिश्वत के रूप में मांगा, जो करीब 4 लाख रुपये था। शिकायतकर्ता ठेकेदार ने इस संबंध में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने 14 अगस्त की सुबह करीब 9.30 बजे पुसद स्थित कार्यकारी अभियंता के क्वार्टर में पहुंचकर शिकायत की पुष्टि की।

जांच के दौरान रिश्वत की मांग से जुड़ी जानकारी सामने आई। इसके बाद एसीबी ने आगे की कार्रवाई की तैयारी शुरू की और शाम को रकम स्वीकार करने की सहमति बनी।

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बिछाया रिश्वतखोरी का जाल

जांच के दौरान एसीबी की टीम ने शिकायत में लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि की। जांच में सामने आया कि कार्यकारी अभियंता जनार्दन चव्हाण ने 4 लाख रुपये की रिश्वत मांगने पर सहमति जताई थी और उसी दिन शाम को यह रकम स्वीकार करने की बात भी तय हुई थी।

इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने नियोजित तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान चव्हाण को 4 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। इस पूरी कार्रवाई को पुलिस अधीक्षक बापू बांगर के मार्गदर्शन में अंजाम दिया गया।

पर्यवेक्षण अधिकारी के रूप में पुलिस उपअधीक्षक राठोड ने कार्रवाई की निगरानी की, जबकि जांच अधिकारी के रूप में पुलिस निरीक्षक शिंदे ने मामले की जांच और कार्रवाई का नेतृत्व किया। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद महावितरण विभाग में हड़कंप मच गया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है और जांच के दौरान अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

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