Yavatmal Agriculture News: यवतमाल जिले में तुती (शहतूत) की खेती और रेशम उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए रेशम संचालनालय, नागपुर द्वारा महा रेशीम 2026 अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान 4 फरवरी से शुरू होकर किसानों को रेशम उत्पादन के लिए जागरूक करने और नए लाभार्थी तैयार करने पर केंद्रित है।
संचालनालय के निर्देशानुसार जिन गांवों में पहले से तुती की खेती और रेशम उत्पादन हो रहा है, वहां शिविर आयोजित कर किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही आसपास के गांवों में भी इस योजना का विस्तार किया जा रहा है। किसानों के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
आवेदन के दौरान आधार कार्ड, सातबारा उतारा, 8-अ नमूना तथा तुती खेती के क्षेत्र का फोटो अपलोड करना अनिवार्य है। पंजीकरण शुल्क 559 रुपये (जीएसटी सहित) ऑनलाइन जमा करना होगा। आवेदन की जांच जिला रेशम अधिकारी द्वारा कर मंजूरी दी जाएगी।
जिला रेशम अधिकारी सुनील दत्त प्रभाकर फडके के अनुसार, वर्तमान में जिले में 654 किसान 749.50 एकड़ क्षेत्र में तुती की खेती कर रहे हैं। वर्ष 2026-27 के लिए अब तक 89 किसानों ने 94 एकड़ क्षेत्र के लिए पंजीकरण कराया है, जबकि जिले को 300 एकड़ का लक्ष्य दिया गया है।
मनरेगा के तहत शहतूत की खेती, देखभाल और रेशम कीट पालन गृह के लिए तीन वर्षों में कुल 4.32 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है।इसके अलावा केंद्र सरकार की सिल्क समग्र-2 योजना के तहत सामान्य वर्ग के किसानों को 75% तक अनुदान मिलता है।