

Yavatmal Irrigation Projects: यवतमाल जिले के बड़े, मध्यम और लघु सिंचाई प्रकल्पों में वर्तमान में 76.19 प्रतिशत जलसंचय उपलब्ध है। किसानों की कपास, तुअर और चारा फसलों के लिए पानी उपलब्ध कराने की मांग को ध्यान में रखते हुए बेंबला और अरुणावती जैसे बड़े प्रकल्पों से आठ दिनों के भीतर, मध्यम प्रकल्पों से दो दिनों में तथा लघु प्रकल्पों से आवश्यकता के अनुसार तत्काल पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया है। यह फैसला जिलाधिकारी विकास मीना की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय जल आरक्षण समिति की बैठक में लिया गया।
बैठक में जिलाधिकारी मीना ने जिले के विभिन्न सिंचाई प्रकल्पों में उपलब्ध जलसंचय और जल आरक्षण की प्रकल्पवार समीक्षा की। आगामी अवधि में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए सख्त नियोजन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल, पशुधन के लिए पानी और चारा उत्पादन को प्राथमिकता देते हुए सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का उचित नियोजन किया जाए, प्रकल्पों से पानी छोड़ने से पहले किसानों को आवश्यक जानकारी देने के निर्देश भी दिए गए।
रबी सीजन में पशुधन के लिए चारे की आवश्यकता बढ़ने की संभावना को देखते हुए चारा फसलों की खेती का नियोजन करने के निर्देश दिए गए। किसानों को चारा फसलों की बुआई के लिए तैयार रहने तथा कम पानी में होने वाली फसलों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया गया। भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए महाबीज से अतिरिक्त चारा बीज का भंडार मंगाने के निर्देश भी दिए गए। जिले में चारा शिविर लगाने की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए अभी से प्रभावी नियोजन करने पर जोर दिया गया। संभावित सूखे की स्थिति से निपटने के लिए मृदा एवं जल संरक्षण के कार्य महत्वपूर्ण साबित होंगे।
इसके लिए जलधारा, वनराई बंधारे, गाद निकालने सहित अन्य कार्यों का प्रारूप तैयार कर नियोजन करने के निर्देश दिए गए। छोटे और तत्काल किए जा सकने वाले कार्यों को शीघ्र शुरू करने के लिए संबंधित विभागों को पहल करने को कहा गया। बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल खत्री, निवासी उपजिलाधिकारी अनिरुद्ध बक्षी, अधीक्षक अभियंता योगेश सोनवणे सहित सिंचाई, भूजल सर्वेक्षण, जलसंधारण, ग्रामीण जलापूर्ति, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण, पशुसंवर्धन और आपदा प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।