

Yavatmal Groundwater Level: यवतमाल शहर में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। ऐसे में आगामी गर्मी के मौसम में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका है। इस स्थिति में नए कुएं और बोरवेल खोदने के बजाय वर्षों से उपेक्षित पड़े पारंपरिक सार्वजनिक कुओं को पुनर्जीवित करने का विकल्प सामने आया है। पार्षद भारत पुष्पा दिगंबर ब्राह्मणकर ने जिलाधिकारी विकास मीना को ज्ञापन सौंपकर पुराने कुओं से गाद निकालने, उनकी सफाई एवं मरम्मत कर उन्हें पुनः पेयजल के उपयोग में लाने की मांग की है।
जिलाधिकारी ने 1 अक्टूबर 2026 को नए कुएं एवं कूपनलिका (बोरवेल) खोदने पर रोक लगाते हुए उपलब्ध जलस्रोतों में मौजूद पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। इस पृष्ठभूमि में पारंपरिक जलस्रोतों का पुनर्जीवन कम खर्च में और तत्काल लागू किया जा सकने वाला प्रभावी विकल्प हो सकता है, ऐसा ब्राह्मणकर ने अपने ज्ञापन में बताया है। विशेष रूप से प्रभाग क्रमांक 17 में कुल सात सार्वजनिक कुएं हैं।
इनमें से पांच कुएं मूर्ति विसर्जन, कचरा और अन्य सामग्री डाले जाने के कारण दूषित हो गए हैं। हालांकि, इन कुओं के भूगर्भ में प्राकृतिक जलस्रोत यानी जीवित झरने अब भी सक्रिय होने का दावा किया गया है। ऐसे में यदि कुओं से गाद निकालकर उनकी सफाई, निर्जंतुकीकरण और आवश्यक मरम्मत की जाए तथा नियमित रखरखाव किया जाए, तो इनका दोबारा जलस्रोत के रूप में उपयोग किया जा सकता है। ब्राह्मणकर ने नगर परिषद में स्थित सार्वजनिक कुओं का तत्काल सर्वेक्षण कराने की मांग की है।
जलसंकट का स्थायी समाधान तलाशने की आवश्यकता पर जोर देते हुए ब्राह्मणकर ने कहा कि टैंकरों पर बार-बार खर्च करने के बजाय शहर में उपलब्ध पारंपरिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए। सार्वजनिक कुओं की सफाई, गाद निकासी और दुरुस्ती के माध्यम से कम खर्च में जलसंकट से निपटने में मदद मिल सकती है।