

Yavatmal Farmer Compensation: अडाण नदी में आई बाढ़ के कारण अकोला बाजार सर्कल क्षेत्र के बोरीसिंह, बारड तांडा, पाहूर नस्करी और रुई परिसर में करीब 100 से 200 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि बहकर नदी के पात्र में समा गई है। भारी नुकसान के बावजूद प्रभावित किसानों का सही पंचनामा और वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा अब तक नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी है। इस संबंध में किसान आंदोलन की ओर से प्रा. पंढरी पाठे, जुबेर सय्यद, कृष्णा पुसनाके और सचिन मनवर ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि अडाण नदी किनारे खेतों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने पर स्थिति बेहद गंभीर दिखाई दी। कई स्थानों पर 50 से 60 फीट गहराई तक की काली उपजाऊ मिट्टी बह गई है। कई किसानों की खेती की जमीन पूरी तरह नदी के बहाव में चली गई है। किसानों के पास सातबारा (भूमि रिकॉर्ड) मौजूद है, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज जमीन का अस्तित्व ही मौके पर नहीं बचा है।
बाढ़ के कारण कपास, सोयाबीन, तुअर और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा बिजली के पोल, स्प्रिंकलर सिस्टम, इलेक्ट्रिक मोटर पंप, ड्रिप सिंचाई जैसी कृषि सुविधाएं भी नष्ट हुई हैं। उपजाऊ मिट्टी बह जाने से कई खेतों की उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है और आगामी सीजन में खेती संभव होगी या नहीं, यह सवाल खड़ा हो गया है। इस अवसर पर आकाश मेश्राम, संदीप काले, विनोद मेश्राम, अनिल रेड्डे, बालू मेश्राम, ऋषिकेश काले, धीरज विलास तुपट, दिनेश शेटे, गजानन रेड्डे, नामदेव कांबले, गोविंदा रेड्डे, महादेव रेड्डे, कुंडलिक काले, गौरव चिंतावार, कुंडलिक भरभडे, उज्वला तुपट, शशिकला जोखे सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
केवल कागजों पर कुछ प्रतिशत नुकसान दर्ज कर पंचनामा करना किसानों के साथ अन्याय होगा। जिन स्थानों पर पूरी कृषि भूमि ही नदी में बह गई है, वहां प्रशासन को मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना चाहिए। किसानों ने बताया कि एक ओर अतिवृष्टि और बाढ़ से खेतों का नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर खरीफ सीजन में भी संकट बना हुआ है। कपास में बोंड नहीं लग रहे हैं, सोयाबीन में फलियां नहीं हैं और तुअर फसल भी खराब स्थिति में पहुंच गई है।